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रामदेव का सत्याग्रह सवालों के घेरे में

रामदेव का सत्याग्रह सवालों के घेरे में

बाबा रामदेव में भरपूर जन सम्मोहिनी शक्ति है, इसमें शायद ही किसी को कोई शक हो, लेकिन उनका सत्याग्रह अन्ना हजारे के अनशन की तरह मीडिया और पब्लिक में बड़ी लहर पैदा कर सकेगा, इसमें बहुत से लोगों को संदेह है। मोटे तौर पर बाबा के सत्याग्रह पर तीन सवाल उठाए जा रहे हैं।

पहला प्रश्नचिह्न् यह है कि कहीं बाबा लोकप्रियता में खुद को अन्ना हजारे के मुकाबले पीछे छूट गए महसूस तो नहीं कर रहे? दूसरे शब्दों में आरोप यह है कि बाबा रामदेव को लगता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी पुरानी मुहिम को अन्ना हजारे उड़ा ले गए और वे अलग थलग पड़ गए। लोग याद दिला रहे हैं कि अन्ना के अनशन को बाबा ने दूसरे दिन से ही प्रत्यक्ष समर्थन देना शुरू किया था। पहले दिन वे जंतर मंतर पर दिखाई नहीं दिए थे।

दूसरा प्रश्नचिह्न् यह है कि कहीं बाबा रामदेव अन्ना हजारे की लोकपाल बिल की मुहिम को कमजोर करने की रणनीति पर तो नहीं चल रहे। टीवी चैनलों पर एक्सपर्ट बिरादरी के लोग आरोप लगा रहे हैं कि लोकपाल बिल में भ्रष्टाचारियों को मौत तक की सजा दिए जाने जैसी बेहद जटिल मांग शामिल कराने की शर्त लगाकर बाबा रामदेव अन्ना हजारे की लोकपाल बिल कमेटी के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं।

वे ऐसे हालात बना रहे हैं कि उससे लोकपाल बिल कमेटी की राह में कांटे बिछ जाएंगे। गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने बुधवार की प्रेस कांफ्रेंस में शांति भूषण और उनके बेटे के खिलाफ लगे आरोपों की रोशनी में उनको दंड दिए जाने की वकालत भी कर दी थी। शांति भूषण लोकपाल बिल समिति में सिविल सोसाइटी के सदस्यों की हैसियत से शामिल हैं।

बाबा के सत्याग्रह पर तीसरा और सबसे बड़ा सवालिया निशान यह लगाया जा रहा है कि अन्ना हजारे की तरह उनका सत्याग्रह गैर राजनीतिक नहीं मालूम पड़ता। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है भले ही वे सार्वजनिक तौर पर अपनी मुहिम के बिल्कुल गैर राजनीतिक होने का दावा कर रहे हों।

गौरतलब है कि अन्ना हजारे के अनशन स्थल पर राजनीतिक नेताओं को आने नहीं दिया गया था। अन्ना हजारे को मीडिया में भी इतना जबर्दस्त समर्थन इसीलिए मिला था कि उन्होंने अपने आंदोलन को किसी दल विशेष के प्रभाव से आजाद कर लिया था। तभी सभी वर्गों के और हर उम्र के लोग उनके समर्थन में आ खड़े हुए थे।

गौरतलब यह भी है कि रामदेव अन्ना हजारे की तुलना में खासे विवादित रहे हैं। खुद उन पर हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के कर्ता धर्ता होने का आरोप है। इसके अलावा उनकी दवाओं में मिलावट के आरोप लग चुके हैं। साथ ही वे गाहे बगाहे राजनीति पर बिन मांगी टिप्पणियां भी करते रहते हैं।

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