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हौसलों की उड़ान ने हर तरफ ला दी हरियाली

हौसला बुलंद हो तो पत्थर से भी पानी निकाला जा सकता है। यमुनापार के पाठा इलाके के एक गांव ने ऐसा कर दिखाया। आसपास के तमाम गांवों में तालाब, कुएं-हैंडपंप सूख गए हैं। जानवरों को भी पानी नहीं नसीब हो रहा है। वहीं गड़ेरिया गांव में हरियाली के साथ भूजल स्तर में ऐसी बढ़ोत्तरी हुई है कि काले खूबसूरत हिरनों ने भी डेरा डाल दिया है।

बेहतर प्रबंधन व तालमेल से गांव में डेढ़ सौ हेक्टेयर इलाके में इस भीषण गर्मी में भी हरियाली है। यह कमाल नए नजरिए का है। पिछले साल तक टोन्स नदी के किनारे बसे इस गांव के हालात दूसरे पठारी गांवों जैसे ही थे। पिछले साल मार्च के अंतिम सप्ताह में इस गांव में जबर्दस्त जल संकट था। लेकिन अब गांव में लगे 15 में से सात हैंडपंप अभी पानी दे रहे हैं। एक कुएं में भी पानी है। यह सब अप्रत्याशित नहीं है। ग्रामीणों ने पौधों को संरक्षित करने का संकल्प लिया। दो साल में इस गांव की डेढ़ सौ हेक्टेयर जमीन पर नालियां बनाकर नीम, पलाश, बबूल व अन्य जंगली पौधों का रोपण कराया गया। दस-दस हेक्टेअर पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी गांव के एक व्यक्ति को सौंपी गई। इस तरह 15 परिवारों को सौ दिन का रोजगार मिला। देखरेख करने वालों को मनरेगा से मजदूरी दी जाती है। नालियां बनाने से जल संरक्षण हुआ तो सालों पहले लगे पौधे भी पनपने लगे। गांव के शेर बहादुर बताते हैं कि अभी दो साल हुए हैं। फिर भी पचास फीसदी असर तो दिख ही रहा है।

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