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डीडीए विकास नहीं विनाश प्राधिकरण: सुप्रीम कोर्ट

राजधानी में सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कब्जे रोकने में विफल रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण की तीखी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि यह विकास प्राधिकरण (डीडीए) नहीं ‘दिल्ली विनाश प्राधिकरण’ बनता जा रहा है।

जस्टिस वीएस सिरपुरकर व जस्टिस जीएस सिंघवी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी कुछ कॉमर्शियल इमारतों की सीलिंग हटाने की अर्जियों पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण की सैकड़ों एकड़ भूमि तथा संपत्तियों पर अतिक्रमण हुआ है, मगर अफसरों को यह नजर नहीं आता। कोर्ट ने प्राधिकरण से पूछा, आप क्या सिर्फ अवैध कब्जेदारों से यूजर चार्ज वसूल रहे हैं? साथ ही कहा उचित स्पष्टीकरण न मिलने पर डीडीए उपाध्यक्ष को तलब किया जाएगा।

कोर्ट का गुस्सा तब भड़का, जब नेहरू नगर में एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक ने 160 वर्ग गज के प्लाट पर बनी इमारत की सील हटाने की अर्जी दी। रिकॉर्ड के मुताबिक जमीन डीडीए की है।

 

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