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फर्जी परीक्षकों से कराईं प्रैक्टिकल परीक्षाएं

सीएसजेएम विश्वविद्यालय के कई संबद्ध कॉलेजों ने प्रैक्टिकल परीक्षाएं बिना परीक्षकों या फर्जी परीक्षकों के करा डालीं। यह किसी ने आरोप नहीं लगाया है बल्कि विश्वविद्यालय ने इसका खुलासा स्वयं किया है। उन कॉलेजों की लिस्ट तो जारी नहीं की लेकिन इनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। ऐसे कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय भी लिया गया है।


यह परंपरा कोई नई नही है लेकिन पहली बार विश्वविद्यालय की नकल के खिलाफ चल रही मुहिम में इसका पर्दाफाश हुआ। दजर्न भर कॉलेजों ने परीक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर लिस्ट विश्वविद्यालय को भेज दी। विश्वविद्यालय ने जब प्रैक्टिकल परीक्षा की स्क्रीनिंग की तो पाया यहां परीक्षक पहुंचे ही नहीं थे लेकिन परीक्षकों के हस्ताक्षर करा लिए गए। विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक में सदस्यों के बीच इसका खुलासा हुआ कि कतिपय कॉलेजों ने बिना परीक्षकों के ही प्रैक्टिकल परीक्षा कराकर फर्जी हस्ताक्षर से अवार्ड लिस्ट विवि को भेजी है। आम सहमति से निर्णय लिया गया कि इस पूरे मामले की जांच होगी और ऐसे सभी कॉलेजों की प्रैक्टिल परीक्षाएं निरस्त की जाएगी। यह परीक्षाएं बाद में दूसरे कॉलेजों में कराई जाएंगी।


यह भी निर्णय लिया गया कि ऐसे कॉलेजों पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। आगे किसी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए निर्णय लिया गया कि अब कॉलेजों के प्राचार्य और परीक्षकों को स्पीड पोस्ट से जानकारी भेजी जाएगी। ऐसे में प्रैक्टिकल में की जा रही गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा। उधर, बीलिब और एमलिब प्रैक्टिकल में कुछ शैक्षणिक कर्मचारियों को परीक्षक बनाए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे चार नाम सामने आए हैं, जिनमें दो विवि के रिटायर्ड कर्मचारी भी हैं।

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