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आईआईटी वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर खोजा पानी

आईआईटी के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर पानी खोजने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लूनर रिमोट सेसिंग आर्बिटर चंद्रयान एवं अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट लूनर रिकोनेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) से मिले चंद्रमा के चित्रों के अध्ययन एवं विश्लेषण के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे।

आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. पीके गर्ग, मास्टर स्टूडेंट्स दीपक सिंह एवं अन्य टीम मेंबर्स अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के साथ चंद्रमा पर पानी खोजने के प्रोजेक्ट में जुटे हैं। प्रो. गर्ग ने बताया कि चंद्रमा के सेटेलाइट चित्रों के अध्ययन के नतीजे चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी की मौजूदगी का संकेत करते हैं। चंद्रमा का उत्तरी ध्रुव हमेशा अंधकार में डूबा रहता है। वे कहते हैं, चंद्रमा पर कभी मौजूद रहा अधिकतर पानी अंतरिक्ष में उड़ गया होगा, लेकिन अंधकार में डूबे ध्रुवीय क्षेत्र में पानी के कण जमकर ट्रैप हो गए, जो बर्फ के रूप में मौजूद हैं।

प्रो. गर्ग एवं उनकी टीम ने उत्तरी ध्रुव के उस इलाके में बर्फ के रूप में पानी खोजा है, जिस तरफ अभी अन्य वैज्ञानिकों का ध्यान नहीं गया है। यहां ‘पियरी’ क्रेटर में बर्फ के रूप में पानी की मौजूदगी मिली है। 17 किमी व्यास के इस विशालकाय गड्ढे के किनारे भी चिकने (स्मूथ) हैं। यह स्थिति किनारों पर बर्फ जमी होने के कारण है। प्रो. गर्ग का कहना है कि यदि भविष्य में चंद्रमा पर इंसानी बस्तियां बसती हैं तो चन्द्रमा पर मौजूद पानी पर्याप्त होगा, यह कहना अभी मुश्किल है। 

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