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पाकिस्तान ने अपना काम किया

पाकिस्तान शायद आतंकवाद का दुनिया का सबसे बड़ा शिकार है। अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, टर्की, यमन, केन्या, तंजानिया, मिस्र, सऊदी अरब और अल्जीरिया जैसे देशों की जनता के साथ ही, पाकिस्तान के लोग भी अल कायदा के निशाने पर हैं। अब हमें इस बात का संतोष है कि इस सदी की उस सबसे बड़ी बुराई को खत्म कर दिया गया है, जो इन सबका कारण थी। और उसके शिकार लोगों को न्याय भी मिल गया है। हमें जहां-जहां उसकी मौजूदगी का शक था, वह उनमें से कहीं नहीं था, लेकिन खैर अब वह जा चुका है।

हालांकि इतवार को जो हुआ, वह कोई साझा ऑपरेशन नहीं था, लेकिन पिछले एक दशक से अमेरिका और पाकिस्तान जिस तरह मिलकर काम कर रहे हैं, उस साझेदारी ने हमें ओसामा बिन लादेन के खात्मे तक पहुंचाया। उस शख्स के खात्मे तक, जो सभ्य दुनिया के लिए खतरा बना हुआ था। पाकिस्तान में हम इस बात पर संतुष्ट हैं कि अल कायदा के कूरियर की पहचान में जो शुरुआती मदद की थी, उसी ने हमें यहां तक पहुंचाया है।

अच्छा रहेगा कि हम स्पष्ट बात करें। आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने की पाकिस्तान ने काफी भारी कीमत चुकाई है। नाटो के कुल मिलाकर जितने सैनिक मरे, उनसे कहीं ज्यादा हमारे जवान मारे जा चुके हैं। दो हजार पुलिस अधिकारी और तीस हजार निरपराध पाकिस्तानी इसका शिकार बन चुके हैं। हमारे लोगों की कई पीढ़ियों की सामाजिक तरक्की इसकी भेंट चढ़ चुकी है। और मेरे  लिए तो बिन लादेन का मारा जाना सिर्फ एक राजनैतिक न्याय नहीं है, यह निजी तौर पर महत्वपूर्ण है। इस देश की एक महान नेता और मेरे बच्चों की मां को आतंकवादियों ने मार दिया था। मेरी बीवी पर उसने दो बार हमले करवाए। 1989 में उसने अविश्वास प्रस्ताव के जरिये मेरी बीवी की सरकार को गिराने के लिए पांच करोड़ डॉलर खर्च किए थे। बेनजीर का कहना था कि वह बिन लादेन के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा हैं- उन्हें जम्हूरियत ने चुना है, वह तरक्कीपसंद हैं, वह उदार हैं और वह अनेकता में यकीन रखने वाली महिला नेता हैं। वह सही थीं, उन्होंने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई।

कुछ अमेरिकी अखबारों का कहना है कि आतंकवादियों को पकड़ने में पाकिस्तान बहुत सक्रिय नहीं है, और कुछ तो यहां तक कह रहे हैं कि पाकिस्तान जिन आतंकवादियों का पीछा करने का दावा करता है, दरअसल वह उनकी मदद ही कर रहा है। इस तरह की आधारहीन अटकलों से भड़कीली केबल न्यूज तो बन सकती हैं, लेकिन उनमें तथ्य नहीं है। अल कायदा को खत्म करने में पाकिस्तान की उतनी ही दिलचस्पी है, जितनी कि किसी दूसरे मुल्क की। दहशतगर्दी के खिलाफ जंग जितनी अमेरिका की है, उतनी ही पाकिस्तान की भी है। और हालांकि यह बिन लादेन से शुरू हुई थी, लेकिन आधुनिकता और उदारता की ताकतों पर अब भी काफी गंभीर खतरा है।

मेरी सरकार राष्ट्रपति ओबामा के शब्दों से पूरी तरह सहमत है, और इतवार की रात हुए खैबर पख्तूनख्वा के कामयाब ऑपरेशन के लिए उन्होंने हमें जो श्रेय दिया, हम उसकी भी प्रशंसा करते हैं। इसी तरह हम विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन के उन शब्दों का भी पूरी तरह समर्थन करते हैं, जिनमें उन्होंने कहा कि अब हमें तेजी से ‘अपनी साझेदारी को बढ़ाकर इस नेटवर्क को और मजबूत बनाना चाहिए, हमें शांति और तरक्की के नजरिये पर और ध्यान देना चाहिए, बेगुनाह लोगों के कातिलों के खात्मे के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए।’ हमने अभी इस जंग को जीता नहीं है, लेकिन अब हम इसके अंत की शुरुआत को देख सकते हैं। हम देख सकते हैं कि दक्षिण और मध्य एशिया का भविष्य अब किस तरह का होगा।
लादेन के खात्मे के कुछ घंटे बाद तालिबान ने पाकिस्तान की सरकार पर आरोप लगाते हुए यह कहा कि वे हमारे नेताओं से बदला लेंगे और खासकर मुल्क के सदर के तौर पर मुझसे बदला लेंगे। हम पर इसका कोई असर नहीं होने वाला। अक्सर मीडिया जिस तरह से बताता है, पाकिस्तान उस तरह से न तो कट्टरपंथियों की शरणस्थली कभी था और न ही कभी रहेगा। यहां कट्टर मजहबी पार्टियों को कभी 11 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं मिले। हाल ही में हुए एक सर्वे से पता लगा कि मुल्क के 85 फीसदी लोग अल कायदा का पूरी तरह विरोध करते हैं। 2009 में जब कुछ समय के लिए तालिबान का स्वात वैली पर कब्जा हो गया था, तो पाकिस्तान के लोगों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे अपना भविष्य ऐसी हुकूमत के साथ नहीं देखते, जिसमें दमन की राजनीति हो, मजहबी कट्टरपंथ हों, औरतों और लड़कियों के साथ भेदभाव हो, जो किताबों का जलाते हों। उन कुछ महीनों ने हमारी जनता को भविष्य के उदार नजरिये से जिस तरह जोड़ा था, वैसे कोई और चीज नहीं जोड़ सकता।

हमारी एक स्वतंत्र तौर पर चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार है, जिसके पास जनता का समर्थन और जनादेश है, जो दुनिया भर की लोकतांत्रिक सरकारों के साथ मिलकर चल रही है, जो आर्थिक तौर पर स्मृद्ध पाकिस्तान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो दुनिया भर के इस्लामी देशों के लिए इस बात का एक मॉडल है कि किस तरह लोगों की उम्मीदों को सिरे चढ़ाया जाए, और किस तरह बच्चों को अवसर दिए जाएं। हमारे पास हर वह चीज है, जिससे अल कायदा और तालिबान को सबसे ज्यादा डर लगता है- हमारे पास इस्लामी भविष्य का एक आधुनिक नजरिया है। हमारी जनता, सरकार, फौज, खुफिया एजेंसियां, सबमें पूरी एकता है। विदेशों में कुछ लोग यह कहते हैं कि ऐसी बात नहीं है, लेकिन वे गलत हैं। पाकिस्तानी एक हैं।

हमारे मुल्क ने एक साथ तकलीफें सही हैं और बलिदान दिए हैं। हम बहादुरी, जज्बे और समर्पण से लड़े हैं। और आखिर में हम ही जीतेंगे। बेनजीर भुट्टो के शब्दों में, ‘सच, इंसाफ और इतिहास की ताकतें हमारे साथ हैं।’

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