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पाकिस्तान की प्रगतिशीलता का क्रांतिकारी तर्क

पाकिस्तान प्रगतिशील देश है। यह बात वामपंथियों को लगभग सत्तर साल पहले ही समझ में आ गई थी, इसीलिए उन्होंने पाकिस्तान बनाने की मांग का समर्थन किया था। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का मानना था कि मुस्लिम एक अलग कौम है, इसलिए अगर वे चाहते हैं, तो उन्हें अलग देश बनाने देना चाहिए। इसका सबसे अच्छा प्रतिवाद स्टालिन के नजदीकी जदानोव ने किया था। जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रूस गया, तो इसके सदस्यों ने धर्म के आधार पर दो देश बनाने का सिद्धांत जदानोव को समझाया, तो वह बोले, ‘यह क्या बेहूदा बात है। धर्म के आधार पर देश कैसे बन सकते हैं। इस हिसाब से तो हम नास्तिकों के लिए अलग देश बनाना होगा।’

कम्युनिस्टों को उम्मीद थी कि पाकिस्तान में मुस्लिम लीग बाहें फैलाकर उनका स्वागत करेगी। जबकि वहां उन्हें जेल में डाल दिया गया। वहां क्रांति करने गए सज्जाद जहीर को प्रतिक्रियावादी जवाहरलाल नेहरू बचाकर भारत लाए। लेकिन पाकिस्तान जो प्रगतिशील हो गया, सो आज तक वैसा ही है। इसकी सबसे बड़ी निशानी यह है अमेरिका विरोध। लेकिन प्रगतिशीलों को जब भी विदेश जाने का अवसर मिलेगा, तो अमेरिका जाना चाहेंगे। जब सोवियत संघ था, तब वे सोवियत समर्थक होने के बावजूद अमेरिकी और सोवियत चीजों में वे अमेरिकी चीजें ही चुनते थे। अब खुद अमेरिकी लोग अमेरिकी चीजें नहीं इस्तेमाल करते। एक ही अमेरिकी चीज उपयोगी है वह है डॉलर। डॉलर लो और जापानी, कोरियन, भारतीय चीज खरीदो, चीनी तक चल जाएगी।

पाकिस्तान भी अमेरिका से डॉलर लेता है और दोस्ती वह चीन से पक्की मानता है। उसे भी पता है कि चीनी किसी को दो रुपये नहीं देते। अमेरिका के साथ यह दोतरफा व्यापार सबसे ज्यादा फायदेमंद है। अमेरिका आपको बेवकूफ बनाए आप उसे बनाओ। लेकिन कब तक? दूसरे प्रगतिशीलों की तरह पाकिस्तान भी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने में उस्ताद है। एक दिन उसे पता चलेगा कि वह ‘विदर अवे’ हो गया, जैसे दूसरे प्रगतिशीलों को पता चला। तब तक इंतजार कीजिए।

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  • Web Title:पाकिस्तान की प्रगतिशीलता का क्रांतिकारी तर्क