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ज्ञान की रोशनी पर बन गई 200 बच्चों की मां

प्रोफेसर सविता भगत और उनके पति प्रोफेसर अरुण भगत शहर में अब बच्चों के लिए समर्पित नाम बन चुके हैं। इस शिक्षाविद् दंपत्ति का दिल कभी अपने बच्चों के लिए धड़कता था। लेकिन ईश्वर को शायद यह मंजूर नहीं हुआ और यह दंपत्ति अपने बच्चों से महरुम रही। 


 खुद के बच्चे नहीं होने के कारण प्रोफेसर सविता को बच्चाों से असीम प्रेम रहा। हर समय बच्चों के साथ खेलने और उन्हें पढ़ाने के लिए उनका मन हिलोरे मारता। कॉलेज से बचे समय को उन्होंने जरुरतमंद बच्चाों को पढ़ाने में लगाया तो उनकी यह तमन्ना पूरी हो गई। संभवत: प्रोफेसर सविता भगत की इसी तड़प ने उन्हें देखते ही देखते 200 बच्चाों की मां बना दिया। उन्होंने यह शुरूआत कुछ बच्चाों को अक्षर ज्ञान कराने के उद्देश्य से की थी। लेकिन अब यह उनका मिशन हो चुका है। वे अब इन बच्चाों को अच्छे स्कूल में भी दाखिल कराकर उनका भविष्य संवारने में जुटी हैं।
डीएवी कॉलेज की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर सविता भगत बताती हैं कि करीब पांच साल पहले सैनिक कॉलोनी के समी पहाड़ी पर बसी स्लम बस्ती के मजदूरों के बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ाना शुरू किया। बच्चाों की संख्या बढ़ती गई, तो उन्होंने इसके लिए टयूशन पढ़ाने वाले लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने भी इसमें सहयोग किया। वे भी अपना कुछ समय उनके बच्चों को देने लगे। अधिकाशं बच्चाे ऐसे समुदाय से आते हैं जिनमें बच्चियों को पढ़ाना जरुरी नहीं समझा जाता है। उन्हें लगा इनमें कुछ बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ना चाहिए। इसके लिए कुछ मित्रों ने भी मद्द की। कई स्कूल भी उनकी मद्द को आगे आए। तीन साल पहले उन्होंने रोशनी नामक एक संस्था का गठन किया। जिससे बच्चों की मद्द आसान हो रही है। अब सेक्टर के लोगों ने उन्हें अस्थाई तौर पर जगह मुहैया करा दी है। स्कूल में लिखित रुप में सभी बच्चों की अभिभावक वह स्वयं हैं। बच्चाे भी उन्हें मां की तरह प्यार करते हैं। उनका सम्मान करते हैं। उनके इस मिशन में डीएवी संस्थान ने उनकी काफी मद्द की है। प्रोफेसर अरुण भगत पत्नी की खुशी को देखकर खुश और संतुष्ट हैं।

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