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मकानों के आंकड़ों का खेला जा रहा है खेल

एयरफोर्स स्टेशन मामले में मकानों के आंकड़ों का खेल खेला जा रहा है। इसमें नगर निगम और एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन की रिपोर्ट जुदा है। आलम यह है कि अब तो निगम के अफसर ही मकानों की संख्या को लेकर उलझ गए हैं। दिए दूसरे शपथ पत्र में पांच हजार से ज्यादा मकान बताकर नगर निगम हाईकोर्ट को गुमराह करने का काम कर रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी दोहरी रिपोर्ट केस को कमजोर कर सकती है। मकान टूटने के रूप में आम व्यक्ति को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।


गौरतलब है कि एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डबुआ एयरफोर्स स्टेशन के सौ मीटर दायरे में अवैध रूप से बने मकानों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। रक्षा मंत्रलय की नोटिफिकेशन के मुताबिक सुरक्षा की दृष्टि से निर्धारित एरिया में मकान बनाना को दूर की बात, यहां पौधा लगाने पर  भी पांबदी है। बहरहाल, इस मसले में नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर ने शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को स्थिति से अवगत करवाया था। इसमें पंद्रह हजार मकान और करीब एक लाख आबादी का जिक्र किया। जिनको बिना नक्शे के बने मकानों की श्रेणी में रखा। नगर निगम अधिनियम के मुताबिक ऐसे मकानों को तोड़ने का प्रावधान है।
बहरहाल, कोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में हंगामा मच गया। लोगों में मकान टूटने का खौफ पैदा हो गया। निगम मुख्यालय में तोड़फोड़ करके लोग अपने गुस्से का इजहार भी प्रशासन के सामने एक बार कर चुके थे। उनकी इस हरकत को देखते हुए निगम प्रशासन ने मौके पर कार्रवाई करने को जोखिम भरा बताकर, जिला उपायुक्त से एचसीएस स्तर के ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की मांग की। मामला चलता रहा। कोर्ट ने एक अप्रैल तक कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। इधर, नगर निगम ने दूसरा शपथ पत्र देने का फैसला किया। पहले शपथ पत्र में जो जानकारी नहीं दी जा सकी थी, उनको दूसरे शपथ पत्र में दर्शाया गया। लेकिन एक अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने शपथ पत्र को स्वीकार नहीं किया। 26 मई अगली तारीख मुकर्र की थी। इस तारीख पर कोर्ट ने निगम का दूसरा शपथ पत्र स्वीकार कर लिया।
दरअसल, दूसरे शपथ पत्र में कोर्ट को जो मकानों के आंकड़े दिए हैं, वो पहले शपथ पत्र से अलग हैं। पहले में मकानों की संख्या पंद्रह हजार बताई थी। अब पांच हजार से ज्यादा मकान बताए गए हैं। दोनों में करीब दस हजार मकानों का फेर है। विशेष बात यह है कि जिला उपायुक्त को सौंपी रिपोर्ट में एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन ने प्रतिबंधित सौ मीटर दायरे में करीब बीस हजार मकान बताए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कोर्ट ने दूसरे शपथ पत्र में दिए पांच हजार मकानों पर आधारित कोई फैसला सुनावा तो पहले शपथ पत्र में बताए पंद्रह हजार में से दस हजार और एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन द्वारा बताए बीस हजार में से पंद्रह हजार मकानों का क्या होगा। क्या उनको अवैध की श्रेणी में रखकर तोड़ दिया जाए, या फिर आंकड़ों के विरोधाभास को लेकर निगम अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो सकती है? ऐसे कई सवाल फिर खड़े हो गए हैं।
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रवि सिंघला, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम: कोर्ट को दिए शपथ पत्र में जो मकानों की संख्या दर्शाई है, वो हाउस टैक्स सर्वे 2001 पर आधारित है। इतने ही मकान वहां बने हुए हैं। बाकी मकान प्रतिबंधित दायरे से बाहर आ रहे हैं।
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चतर सिंह राणा, प्रधान संघर्ष समिति: शपथ पत्र को सार्वजनिक किया जाए। यहां करीब पच्चीस हजार मकान हैं। जो सही आंकड़ा है। 1996 से पहले कालोनी पास है। सभी चाजिर्स निगम को संबंधित क्षेत्र के लोग दे रहे हैं। निगम की तरफ से भी समूची सरकारी सर्विस लोगों को मिल रहे हैं।

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  • Web Title: मकानों के आंकड़ों का खेला जा रहा है खेल