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दवाई के साथ टोटका से भी जारी

चिकन पॉक्स को लेकर गांव में हड़कंप है। डेढ़ महीने से गांव के बच्चाे इस बीमारी की चपेट में हैं। एक ठीक होता है दूसरा बीमार हो जाता है। इससे गांव में अफरातफरी का माहौल है। गांव के लोग चिकन पॉक्स को माता कहकर पुकारते हैं। इसके चलते बच्चों का इलाज दवाई के साथ टोटका से भी किया जा रहा था।

हर बच्चाे के गले में लाल कपड़े में ताबीजनुमा गंडा बंधा हुआ था। जिसमें बांधे गए हैं नीम के पत्ते। इसके साथ ही मरीज के गले में सोने की चेन या फिर गंडे के साथ सोने का कोई भी छोटा बड़ा आभूषण बंधा हुआ था। बच्चों के घर से निकलने व नहाने पर पाबंदी लगाई हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक मरीज की चारपाई के किनारे नुकीला हथियार या फिर माचिस रखना जरूरी होता है। इसके चलते घरों में चारपाई के साथ दरांती व चाकू रखे हुए थे। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि अब तो इस माता निकलने पर थोड़ा बहुत इलाज कराने लगे हैं, लेकिन एक समय था जब इस माता के निकलने पर डॉक्टर से दवाई दिलाना अच्छा नहीं मानते थे। लेकिन अब बिना दवाई के यह माता ठीक नहीं होती है। यही नहीं, घर के दरवाजे पर सिर्स के पेड़ की छोटी टहनियां काटकर लगाई हुई थी। उनका मानना था कि इससे माता जल्दी शांत हो जाती हैं।

जिस घर में चिकनपॉक्स, वहां नहीं लगा छौंक
जाजरु गांव के जिस घर में बच्चे चिकनपॉक्स की चपेट में आ जाता है। उस घर में सब्जी या अन्य किसी तरह का छौंक लगाना बंद कर दिया जाता है। यही नहीं, तवा पर परांठे तक बनाने की पाबंदी होती है। इसे लेकर मानना है कि छौंक लगने से जो स्मैल पैदा होती है, उससे चिकनपॉक्स को बढ़ावा मिलता है।

चिकनपॉक्स के चलते पढ़ाई रही प्रभावित
चिकनपॉक्स के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रही। वहीं उनके परिजन भी काफी परेशान रहे। दरअसल, चिकनपॉक्स निकलने के बाद घर से बाहर जाना बंद कर दिया जाता है। ऐसे में बच्चों के परिजन किसी भी विवाह समारोह और अन्य कार्यक्रमों में नहीं जा सके। एक महिला ने बताया कि उसे अपने मायके शादी में जाना था, लेकिन उसका बेटा चिकनपॉक्स की चपेट में है। इसके चलते उसे अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।

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