DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वेतन नहीं बढ़ाने पर एथलेटिक्स कोच ने पद छोड़ा

बेलारूस के कोच निकोलेई स्नेसारेव ने खेल मंत्रालय के वेतन बढ़ाने की उनकी मांग नहीं मानने पर भारत नहीं लौटने का फैसला किया है। उन्होंने प्रीजा श्रीधरन, सुधा सिंह और कविता राउत जैसी लंबी दूरी की धाविकाओं की एशियाई खेलों की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी।
निकोलेई ने 2012 लंदन ओलंपिक खेलों की एथलीटों की तैयारी के लिए कोचिंग स्टाफ के रूप में उनका अनुबंध बढ़ाए जाने पर वेतन में भारी भरकम इजाफे की मांग की थी। वह चाहते थे कि उन्हें 5000 हजार डालर प्रति माह की जगह आठ हजार डालर प्रति माह मिले। यह कोच यह भी चाहता था कि साइ उनकी पत्नी को भी नौकरी दे। उनकी पत्नी सहयोगी स्टाफ बनने की पात्र है।

दूसरी तरफ साइ उन्हें प्रति माह एक हजार डालर से अधिक की वेतन वृद्धि सहित छह हजार डालर प्रति माह के अलावा उनकी पत्नी को दो हजार डालर की नौकरी से अधिक की पेशकश को तैयार नहीं है। इस कोच ने इस पेशकश से इंकार कर दिया।

एशियाई खेलों में निकोलेई के मार्गदर्शन में काम करने वाले एथलीटों के दमदार प्रदर्शन के बाद यह कोच पिछले साल दिसंबर में स्वदेश लौट गया था। साइ ने इसके बाद उन्हें कहा था कि वह 30 अप्रैल तक बताए कि नई शर्तों पर राजी हैं या नहीं।

भारतीय एथलेटिक महासंघ के सूत्रों ने बताया कि निकोलेई ने कुछ दिन पहले महासंघ को सूचित कर दिया था कि वह खेल मंत्रालय की नई पेशकश के तहत भारत में काम करने के लिए नहीं लौट रहे।

सूत्र ने कहा कि उन्होंने हमें ईमेल भेजा कि नई पेशकश के तहत काम करने के लिए वह तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनकी कई अच्छी यादें जुड़ी हैं लेकिन वह वापस नहीं आ रहे। निकोलेई के मार्गदर्शन में राष्ट्रमंडल खेलों की 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य और एशियाई खेलों की इसी स्पर्धा में रजत जीतने वाली कविता ने कहा कि मैं क्या कह सकती हूं। यह मेरे लिए बड़ा नुकसान है। निजी तौर पर मेरे प्रदर्शन में सुधार और मेरी उपलब्धियों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। मैंने वेतन बढ़ाने पर साइ के साथ उनके मुद्दे के बारे में सुना था और मैंने सोचा था कि वह हमारे साथ जुड़े रहेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वेतन नहीं बढ़ाने पर एथलेटिक्स कोच ने पद छोड़ा