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एशियाई देशों को संभलकर चलने की जरूरत: प्रणव

एशियाई देशों को संभलकर चलने की जरूरत: प्रणव

भारत ने बुधवार को एशियाई देशों को आगाह करते हुए कहा कि उन्हें संभलकर आगे बढ़ने की जरूरत है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की वार्षिक बैठक के दौरान यहां एशिया 2050 विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएं आटोपायलट नहीं हैं।
   
एडीबी की आज जारी रपट में उल्लिखित बातों से सहमति जताते हुए मुखर्जी ने कहा, बहुत तेज आर्थिक वृद्धि दर के बावजूद एशिया आटोपायलट नहीं है। वास्तव में इसे एक समृद्ध एशिया का लक्ष्य हासिल करने के लिए संभलकर चलने की जरूरत है।
   
एक समृद्ध एशिया न केवल एशियाई लोगों का जीवन बेहतर बनाएगा, बल्कि विश्व आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करेगा। परिवहन एवं ऊर्जा के जरिये क्षेत्रीय सहयोग एवं एकीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे एशिया के एक जबर्दस्त क्षेत्रीय बाजार बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
   
मुखर्जी ने कहा कि अगर एशिया को एक प्रभावशाली क्षेत्र बनना है, तो व्यापक, समावेशी एवं सतत आर्थिक वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि करीब एक अरब लोग जिनमें से ज्यादातर एशियाई हैं, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करते हैं।
   
मुखर्जी ने कहा कि एशियाई देशों को सतत रूप से ऊंची वृद्धि दर सुनिश्चित करने के लिए अगले 40 साल में अपनी अर्थव्यवस्थाओं को ज्ञान आधारित और कौशल आधारित अर्थव्यवस्थाओं में तब्दील करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

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