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कश्मीर : दादा व पिता के बाद पोते की बारी

जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के लिए नेकां और कांग्रेस में सहमति बन गई है। दादा शेख अबदुल्ला व पिता फारूख के बाद अब पोता उमर अब्दुल्ला की बारी है, जो इस राज्य के मुखिया की कमान संभालेंगे। मंगलवार को उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद इसकी घोषणा की। जम्मू कश्मीर के युवा नेता उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में नेशनल कान्फ्रेंस व कांग्रेस की गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग मंगलवार को प्रशस्त हो गया। नेशनल कान्फ्रेंस अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर राय में दोनों दलों की गठबंधन सरकार बनाने का प्रस्ताव किया, जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया। अब्दुल्ला ने संवाददाताआें को बताया कि गठबंधन सरकार के गठन की बारीकियां तय करने के लिए दोनों दलों की एक कमेटी गठित की जाएगी। सोनिया व उमर की मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर मंगलवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक हुई और समझा जाता है कि उस में तमाम पहलुआें पर विचार के बाद नेशनल कांफ्रेस को समर्थन देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय में रायमंत्री और जम्मू कश्मीर के लिए कांग्रेस के प्रभारी पृथ्वी राज चव्हाण ने कहा कि सोनिया गांधी ने नेशनल कांफ्रेस के अध्यक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अब्दुल्ला ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह की तारीख और सरकार के स्वरूप के बारे में फैसला कमेटी करेगी। उन्होने उन्होने कहा कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस बराबरी की हिस्सेदार होगी। उन्होने कहा कि कांग्रेस बाहर से समर्थन नहीं देगी बल्कि सरकार में भागीदार होगी। अब्दुल्ला ने कहा उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता बुधवार तक यहां पहुंचेगें और उसके बाद ही बाकी के फैसले ले लिए जाएगें। गौरतलब है कि राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस सबसे 28 बड़े दल के रूप में उभरा। कांग्रेस को चुनावों में 17 सीटों पर सफलता मिली। 87 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 44 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।

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