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बीसीसीआई ही नहीं आईपीएल को भी भाते हैं विदेशी कोच

बीसीसीआई ही नहीं आईपीएल को भी भाते हैं विदेशी कोच

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक दशक पहले विदेशी खिलाड़ियों को कोच बनाने की जो परंपरा शुरू की थी वह अब भारत में इतनी जड़े जमा चुकी है कि इंडियन प्रीमियर लीग की भी कोई फ्रेंचाइजी किसी भारतीय को कोच नहीं बनाना चाहती है।

बीसीसीआई ने राष्ट्रीय टीम के लिए नंवबर 2000 में पहली बार न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान जॉन राइट को कोच नियुक्त किया था। उसके बाद उसने ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल और दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन को यह पद सौंपा। अब जिम्बाब्वे के डंकन फ्लैचर को कोच बनाया गया है जिसकी सुनील गावस्कर और कपिल देव सरीखे दिग्गजों ने आलोचना भी है।

गावस्कर के अनुसार मोहिंदर अमरनाथ जबकि कपिल देव के हिसाब से वेंकटेश प्रसाद या रोबिन सिंह में से किसी को यह पद सौंपा जाना चाहिए था। श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने भी किसी भारतीय को कोच नहीं बनाने पर हैरानी जतायी।

बीसीसीआई का यही रवैया आईपीएल फ्रेंचाइजी भी अपना रही हैं। यही वजह है कि वर्तमान में चल रहे टूर्नामेंट में सभी दस टीमों के पास विदेशी और खासकर ऑस्ट्रेलियाई कोच हैं। आईपीएल की दस टीमों में से सात टीमों के कोच ऑस्ट्रेलियाई हैं। पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को कुछ टीमों ने सहायक कोच जरूर बनाया है लेकिन मुख्य जिम्मेदारी विदेशी कोच ही निभा रहे हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने 2009 में आईपीएल टीमों के इस रवैये पर हैरानी जतायी थी। उन्होंने तब कहा था कि मेरा मानना है कि भारतीय कोच काफी अच्छे हैं और उन्हें भी विदेशी कोचों के समान अवसर दिए जाने चाहिए। अधिकतर टीमों के पास विदेशी कोच हैं और मुझे पता नहीं कि ऐसा क्यों है।

गांगुली ने जब यह टिप्पणी की थी तब केवल मुंबई इंडियन्स के पास प्रवीण आमरे के रूप में भारतीय कोच थे। अब मुंबई ने भी दक्षिण अफ्रीका के पूर्व शॉन पोलाक को कोच बना दिया है जबकि आमरे पुणे वॉरियर्स के साथ ऑस्ट्रेलियाई ज्यौफ मार्श के मातहत सहायक कोच की भूमिका निभा रहे हैं।

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग भी पोलाक की तरह अपनी फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ से खेला करते थे लेकिन अब उसके कोच हैं। दक्षिण अफ्रीका के रे जेनिंग्स रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के कोच हैं जबकि पूर्व कप्तान अनिल कुंबले वहां सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं।

बाकी अन्य सातों टीमों के कोच ऑस्ट्रेलियाई हैं। इनमें पुणे वॉरियर्स के ज्यौफ मार्श, दिल्ली डेयरडेविल्स के ग्रेग शिपर्ड, किंग्स इलेवन पंजाब के माइकल बेवन, डेक्कन चार्जर्स के डेरेन लीमन, कोलकाता नाइटराइडर्स के डेव वॉटमोर और कोच्चि टस्कर्स केरल के ज्यौफ लॉसन शामिल हैं। राजस्थान रॉयल्स में शेन वॉर्न कोच और कप्तान दोनों भूमिकाएं निभा रहे हैं। नाइटराइडर्स में वॉटमोर के साथ सहायक कोच विजय दहिया हैं जो दिल्ली रणजी टीम के कोच रह चुके हैं।

आईपीएल के इन सभी कोच में से शिपर्ड और जेनिंग्स को केवल प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने का अनुभव है। यह अलग बात है कि जब जेनिंग्स खेला करते थे तब दक्षिण अफ्रीका पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का प्रतिबंध लगा था।

दिलचस्प बात यह है कि आईपीएल टीमों ने युवा कोच नियुक्त करने को तरजीह दी है। इसमें वॉर्न सहित पांच कोच की उम्र 42 साल से कम है। वॉटमोर सबसे उम्रदराज कोच हैं। उनकी उम्र 57 साल हैं लेकिन वह भी भारत के नवनियुक्त कोच फ्लैचर (62 साल) से पांच साल छोटे हैं।

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