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ढाई साल के अनचाहे मेहमान से यूपी में हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राय के करीब आधा दर्जन जिलों के सौ से यादा गांवों के लोग इन दिनांे अनचाहे मेहमान के खौफ के साए में जिन्दगी बसर कर रहे हैं। दुधवा (लखीमपुर खीरी) के जंगल से भटक कर एक बाघ आजकल आबादी के आसपास पहुंच चुका है। शाहजहांपुर जिले में करीब एक पखवाड़े तक भटकने के बाद सीतापुर के सीमावर्ती इलाकों से होकर बाराबंकी के कोठी एवं असन्द्रा क्षेत्रों, लखनऊ के गोसाईगंज और सुलतानपुर के सुकुल बाजार इलाकों में लोगों को खौफजदा करके इस बाघ ने अब फैजाबाद के रुदौली इलाके के रामपुरजनक जंगल में पनाह ले रखी है, जहां वह पिछले तीन-चार दिन में एक नीलगाय के बच्चे और एक बकरी को अपना शिकार बना चुका है। बाराबंकी जिले के कोठी क्षेत्र के सराय बेलहरी जंगल में सरई गांव के 14 वर्षीय खुशीराम को गत 21 दिसम्बर को अपना ग्रास बनाने के बाद आदमखोर घोषित किए जा चुके इस बाघ की तलाश में वन विभाग के लखनऊ और बाराबंकी रेंज के अलावा कतरनिया घाट, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और लखनऊ चिड़ियाघर के करीब तीन सौ कर्मचारी जुटे हुए हैं। कई नामी शिकारी चार विशेष हाथी और उत्तराखंड से आई टीम भी इस बाघ की तलाश के अभियान में मदद कर रहे हैं। मगर तू डाल-डाल, मैं पात-पात की तर्ज पर बाघ लगातार आंखमिचौली खेल रहा है। बाघ के अब तक पकड़ में नहीं आने से लोगों में जबरदस्त दहशत है। प्रभावित इलाकों में शाम ढलने से पहले ही लोग घरों में बंद हो जाते हैं। गांव की चौपाल से लेकर सडकों तक सन्नाटा पसर जाता है और अकेले के बजाय चार पांच लोग टुकड़ी बनाकर निकलते हैं। बाघ के अब तक पकड़ में नहीं आने की वजह से हर तरफ अफवाहों का बाजार गर्म है। कफ्यरू जैसे माहौल के बीच बाराबंकी के कई गांवों के स्कूल बाघ के आतंक के मद्देनजर बंद हैं। वनकर्मियों द्वारा इस बाघ को बस्ती से दूर रखने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों के बीच प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों ने भी एहतियातन बांस-खप्पचों की बाड़ बनाकर अपने मवेशियों को किसी नुकसान से बचाने की पेशबंदी कर ली है। बाघ के खौफ में जिन्दगी बसर कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि दिन तो जैसे तैसे कट जाता है मगर रात गुजारना मुश्किल हो जाता है। हर पल किसी अनहोनी की आशंका में गुजरता है। प्रशासन ने सुरक्षा के बंदोबस्त भी नहीं किए हैं। रात में अलाव और मशाल जलाकर लठैत और असलहाधारी पहरा दे रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस बाघ की उम्र करीब ढाई साल है। आमतौर पर मादा बाघ अपने शावक को इस उम्र तक ही अपने साथ रखती है और फिर अपना अलग प्रभाव क्षेत्र बनाने के लिए बच्चे को छोड़ देती है। यह बाघ भी संभवत: अपनी मां से अलग होकर भटककर यहां तक आ पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बाघ अभी अपरिपक्व है और ठीक से शिकार नहीं कर पाता। हाथी और भीड़भाड़ देखकर वह डरकर दुबक जाता है जिससे वह अब तक वन विभाग के शूटरों से बचा हुआ है। सूत्रों ने बताया कि वैसे भी बाघ इंसानों से दूर ही रहता है। उसे तकरीबन सौ मीटर की दूरी से मानुषगंध मिल जाती है और वह सजग हो जाता है। अपनी प्राकृतिक शरणस्थली से संभवत: पहली बार बाहर आया यह बाघ इंसानों से कहीं यादा दहशत में है जिसके चलते वह लगातार भाग रहा है। उन्होंने कहा कि बाघ कभी भी शिकार के लिए रिहायशी इलाकों में नहीं जाता। यह बात दीगर है कि वह भटककर आबादी के बीच आ जाए। इसके बावजूद आमतौर पर बाघ सिर्फ आत्मरक्षा के लिए ही इंसानों पर हमला करता है। सूत्रों ने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि उसे जिंदा पकड़ा जाए। अंतिम विकल्प के रूप में ही उसे मारा जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघ को अगर पकड़ लिया जाता है तो उसे दोबारा जंगल में छोड़ा जा सकता है, लेकिन इस बाघ के मुंह आदमी का खून लग चुका है। अब पकड़े जाने पर उसे चिड़ियाघर में रखना होगा। फिलहाल वन विभाग के लिए पहेली मीडिया विशेषकर इलेक्ट्रानिक चैनलों के लिए कौतूहलपूर्ण स्टोरी और ग्रामीणों के खौफ का सबब बने इस बाघ की वजह से लोगों की धुकधुकी थमने का नाम नहीं ले रही जबकि रोमांच और आतंक का पर्याय बन चुका बाघ एक छलावे की तरह यहां-वहां अपने पदचिन्ह छोड़कर लगातार नदारद होने में कामयाब हो रहा है। दुधवा से निकलकर शाहजहांपुर सीतापुर बाराबंकी लखनऊ सुलतानपुर के रास्ते फैजाबाद के रुदौली क्षेत्र के रामपुरजनक जंगल में पहुंचा यह बाघ पिछले करीब डेढ़ महीने में एक किशोर के अलावा कई गाय, बकरी और नीलगायों को अपना शिकार बना चुका है। वन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाघ फिलहाल जिस दिशा में चल रहा है अगर वह उस पर चलता रहा तो कतर्नियाघाट के जंगलों में पहुंच जाएगा। वैसे, प्रदेश में किसी बाघ के भटककर शहरी क्षेत्र में आ जाने की यह पहली घटना नहीं है। राजधानी लखनऊ के कुकरैल क्षेत्र में वर्ष 1में निकले बाघ को गोली मारी गई थी। आठ साल पहले शाहजहांपुर में गन्ने के खेत में आ छिपी एक बाघिन को ग्रामीणों ने लाठी डंडो से पीट पीटकर मार गिराया था। इसके अलावा वर्ष 2001 में हरदोई जिले में निकले एक बाघ को गोली मारी गई थी।

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  • Web Title: ढाई साल के अनचाहे मेहमान से यूपी में हड़कंप