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साक्षरता दर बढ़ाने में पुलिस भी मददगार

पिछले 10 वर्षों के दौरान बिहार ने साक्षरता दर में वृद्धि के मामले में लम्बी छलांग लगाई है। राज्य इस मुकाम पर ऐसे ही नहीं पहुंचा है। राज्य में कुछ वर्ष पूर्व तक लोग जहां पुलिस को देखकर अपना रास्ता बदल देते थे, वहीं अब पुलिस घर से बच्चों को निकालकर उनका स्कूल में नामांकन करवाने और उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित कर रही है।

कम्युनिटी पुलिसिंग योजना के तहत बिहार में पुलिस गांवों से लेकर शहरों तक में कई तरह के सामाजिक कार्य कर रही है। इसके तहत सुदूरवर्ती गांवों में जहां चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं, वहीं खेल-कूद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। खास बात यह कि ऐसे आयोजन ज्यादातर उन क्षेत्रों में किए जा रहे हैं जो नक्सल प्रभावित माने जाते हैं।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष राज्य की पुलिस ने 34,707 बच्चों का दाखिला स्कूलों में करवाया था। मुख्यमंत्री की पहल पर शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना में ज्यादातर उन बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है जो गरीब और अशिक्षित तबके से आते हैं।

पुलिस विभाग की योजना स्कूल में नामांकन करवाने के बाद यह देखने की भी है कि बच्चे अब भी स्कूल जा रहे हैं या नहीं। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक राज्यवर्धन शर्मा बताते हैं कि गरीब परिवारों के बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने के साथ पुलिस अब इस बात की भी समीक्षा करेगी कि दाखिले के बाद बच्चे लगातार स्कूल जा रहे हैं या नहीं।

वह कहते हैं कि इस मुहिम से जहां पुलिस की छवि में सुधार आएगा, वहीं जनमित्र (पीपुल्स फ्रेंडली) होने की पुलिस की कोशिश को भी बल मिलेगा। इस कार्य से ग्रामीण क्षेत्रों में भी आम लोगों का पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा है।

एक अन्य पुलिस अधिकारी की मानें तो चार वर्ष पूर्व शुरू किए गए इस कार्य में शुरुआत में कई थाना पुलिस ने इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस अधिकारियों की दिलचस्पी इसमें कम होने लगी। पुलिस ने हालांकि इस वर्ष के पहले तीन महीने में भी 9,943 बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाया है।

इस मामले में नालंदा प्रथम स्थान पर है, जहां पुलिस ने विभिन्न विद्यालयों में अब तक 919 बच्चों का नामांकन करवाया है। इसके बाद पटना में 570 तथा बेगूसराय में 529 बच्चों को पुलिस ने विद्यालय भेजा है। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कई जिलों में अब भी इस योजना पर कोई खास पहल होती नहीं दिख रही है।

गौरतलब है कि राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में भी यह योजना पुलिस द्वारा सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। राज्य के नक्सल प्रभावित बांका, मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिले में भी वर्ष के पहले तीन महीनों में इन सभी जिलों में 40 से 50 बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया गया है।

राज्य के शिक्षा मंत्री पी के शाही भी मानते हैं कि ऐसे कार्यों से पुलिस की छवि में सुधार हो रहा है तथा स्कूलों में भी बच्चों की संख्या बढ़ रही है। वह कहते हैं कि संभवत: बिहार ऐसा पहला राज्य है जहां की पुलिस शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रही है। इससे राज्य में साक्षरता दर बढ़ेगी।

शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही स्वयंसेवी संस्था 'बियॉन्ड होरिजन' के अध्यक्ष सौरभ रंजन का मानना है कि राज्य पुलिस की ओर से कम्युनिटी पुलिसिंग योजना के तहत की जा रही ऐसी पहल से जहां राज्य में पुलिस की छवि में सुधार हो रहा है, वहीं जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। वह कहते हैं कि पुलिस की पहल के बाद गरीब अभिभावकों में बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में बिहार में महिला साक्षरता दर जहां 33.1 प्रतिशत थी, वहीं अब बढ़कर 53.33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसी तरह पुरुषों की साक्षरता दर 2001 में 59.7 प्रतिशत थी जो अब 73.05 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

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