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महंगाई की मध्यम वर्ग पर और मार

सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर चुकी महंगाई से लड़ाई का मोर्चा अब रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने संभाला है। मगर, आरबीआई के तरकश के तीर की चोट बेलगाम महंगाई पर कम बल्कि मध्यमवर्ग और उद्योग जगत पर ज्यादा है। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को अल्पकालिक उधारी दर (रेपो) बढ़ाकर 7.25 प्रतिशत करने का ऐलान किया, जिसके बाद ऑटो तथा होम लोन की किश्त महंगी होने के आसार हैं। महंगाई घटाने के नाम पर उसने सालभर में नौ बार इस हथियार को आजमाया है, लेकिन कीमतें काबू नहीं हुई। हालांकि, बैंक बचत दर 3.5 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर  लघु बचतकर्ताओं को राहत दी गई है।

वार्षिक मौद्रिक नीति 2011-12 का ऐलान करते हुए आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकता विकास की बजाय महंगाई काबू करना है। रेपो रेट में आधा प्रतिशतांक बढ़ोत्तरी की है, जो अब 7.25 फीसदी होगी। बता दें कि रेपो वह दर होती है जिस पर बैंक आरबीआई से उधार लेते हैं। आरबीआई की घोषणा के बाद बैंकों ने भी अपनी उधारी दरें बढ़ाने का संकेत दिया है।
आईडीबीआई बैंक के मुख्य निदेशक आर के बंसल ने कहा कि बैंकों के पास ब्याजदर बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं है।

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