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राजमा देवी बोलीं, मैं जिंदा हूं सीडीओ साहब!

सरकारी दस्तावेजों में आठ साल पहले मर चुकी राजमा देवी खुद के जिंदा साबित करने के लिए सरकारी ऑफिसों के चक्कर काट रही है। लेकिन अफसर, इस बुजुर्ग विधवा को राहत नहीं दे पा रहे हैं। राजमा देवी का कहना है कि, उसके भतीजों ने पटवारी से मिलकर मृत दिखा कर उसे मिलने वाले मुआवजे के साढ़े सात लाख रुपए डकार लिए। गांव में बन रही बिजली परियोजना में गई जमीन के बदले उसे यह मुआवजा मिलना था।

अपने जीवित होने का सबूत हासिल करने के लिए बुजुर्ग राजमा देवी मंगलवार को जोशीमठ पहुंचे सीडीओ डॉ. बी. षडमुगम के पास पहुंचीं। जब उन्होंने बताया कि, सरकारी अभिलेखों में मुझे मरे आठ साल हो गए हैं पर अभी मैं जिंदा हूं, सीडीओ अवाक रह गए। राजमा ने बताया, पांडुकेश्वर के खीरों गांव निवासी उसके पति थैपडू की मौत के बाद लगभग 5 नाली जमीन उसके नाम हुई थी। यह जमीन गांव में बन रही बिजली परियोजना के लिए ले ली गई। जमीन के बदले उसे साढ़े सात लाख रुपए मुआवजा मिलना था। मुआवजा हड़पने के लिए उसके भतीजों ने पटवारी और राजस्व कर्मचारियों मिल कर 10 मई 2002 को उसे मृत दिखा कर जमीन अपने नाम करवा ली। परिवार रजिस्टर से भी उसका नाम काट दिया गया है। अपने जिंदा होने का सबूत में राजमा ने समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली विधवा पेंशन की पासबुक भी दिखायी।

सीडीओ डॉ. बी. षणमुगम ने राजमा देवी को भरोसा दिलाते हुए कहा कि, इस षडयंत्र में जो भी कर्मचारी शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जोशीमठ के एसडीएम जोशीमठ देवानन्द शर्मा ने कहा कि, बिजली परियोजना से मिलने वाले मुआवजे को हड़पने के लिए यह षडयंत्र किया गया। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है। राजमा देवी को उसका हक दिलाया जाएगा। 

 

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