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बसें बनानी हैं 700 और कर्मचारी 138, बहुत नाइंसाफी है

राज्य के बजट में परिवहन मंत्री ने हरियाणा बस डिपो में 700 नई बसें शामिल करने का ऐलान किया था। मंत्री ने यह घोषणा की थी कि जरूरत के हिसाब से राज्य के सभी बस डिपो में एक साल के अंदर नई बसें दी जाएंगी। सिर्फ एक साल में 700 नई बसें हरियाणा रोडवेज के बेड़े में शामिल करने का सपना फिलहाल हकीकत से कोसों दूर दिखाई दे रहा है। वजह पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों का न होना।


हरियाणा रोडवेज की सामान्य (डीजल व सीएनजी) बसों के बॉडी सेक्शन का निर्माण बहरामपुर रोड पर स्थित हरियाणा रोडवेज संयुक्त इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचआरसीईसी) में होता है लेकिन इस वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी की वजह से बसों के निर्माण कार्य में काफी देरी होती है। 

138 कर्मचारियों के भरोसे वर्कशॉप
बहरामपुर वर्कशॉप सिर्फ 138 कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है जबकि  जरूरत 300 से भी ज्यादा कर्मचारियों की है। पिछले 23 साल से यहां एक भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है जबकि प्रदेश की सभी रोडवेज की बसों के निर्माण व देखरेख का जिम्मा इसी वर्कशॉप पर है।

317 से 138 रह गई संख्या :
सूत्रों के मुताबिक नवंबर 1987 में इस वर्कशॉप में अधिकारी व कर्मचारियों को मिलाकर 317 के करीब स्टाफ था। इसके बाद से इस वर्कशॉप में एक भी नई नियुक्त नहीं की गई। हर साल आधा दजर्न के करीब कर्मचारी रिटायर होते रहे। इतना ही नहीं करीब एक दजर्न स्थायी  कर्मचारियों तक को भी नौकरी से निकाल दिया गया। इसका मामला अभी भी श्रम कोर्ट में लंबित है। वर्कशॉप संगठन के मुताबिक इन कर्मचारियों को निकालते समय यह बहाना बनाया गया था कि वर्कशॉप में कर्मचारियों की आवश्यकता ही नहीं है जबकि वर्तमान में स्थिति यह है कि कर्मचारियों की कमी के चलते वर्कशॉप में बसों का निर्माण समय पर नहीं हो पा रहा है।

हर महीने 12 बस का ही हो पाता है निर्माण
वर्कशॉप की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यहां पर प्रति माह 12 बसें के निर्माण जितने ही कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में एक साल के अंदर 700 नई बसों का निर्माण कर पाना मुमकिन नहीं है। लगभग सात कर्मचारियों को एक बस के निर्माण में एक माह का समय लगता है।

कर्मचारियों में बढ़ रहा है तनाव:
स्टाफ की कमी के चलते बाकी कर्मचारियों पर वर्कलोड काफी ज्यादा है। बसों केनिर्माण के लिए कर्मचारियों को 15-15 घंटे तक कार्य करना पड़ता है। जिससे वर्कशॉप कर्मचारियों में तनाव भी बढ़ रहा है। जिसका असर कार्य पर पड़ रहा है।

अधिकारी की बात:
राजीव नागपाल, महाप्रबंधक, एचआरसीईसी
हरियाणा रोडवेज की सभी सामान्य (डीजल व सीएनजी) बसों के बॉडी सेक्शन का निर्माण इसी वर्कशॉप में होता है। मेरी जानकारी के मुताबिक पिछले कई साल से यहां पर कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। स्टाफ की कमी के चलते निर्माण कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।

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