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वेलकम, विरोध की हांडी का पुलाव तय्यार है

सुबह की धीमी धूप में मौलाना चुपचाप गुमसुम यों खड़े थे, जैसे अचार को धूप दिखाई जा रही हो। जाने कहां देखते हुए बोले, ‘भाई मियां, आपने तो नबातात (बॉटनी) पढ़ी है..किताबें लिखी हैं। फन्जाई जानते ही होंगे..फफूंद। इस मुल्क को भ्रष्टाचार की फफूंद ने ढांप लिया है। नीचे का अचार नजर ही नहीं आता। फफूंद में यही खूबी है कि एक रेशा भी रह जाए, तो तेजी से ग्रोअप करके फफूंद का छत्ता बना लेता है। एक बुजुर्ग अन्ना हजारे कहां-कहां की फफूंद हटाएंगे। ऊपर से लग्घी मारने वाले हजारों। एक सिनेमा वाली बोली हैं कि अन्ना सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं। गोया फफूंद का जाल बिछाने वाले नासपीटे सरकार को ‘ह्वाइटमेल’ कर रहे हैं? नानसेंस। बकौल अकबर इलाहाबादी- चोर आए, चोरी की, सब कुछ उठाकर ले गए..कर ही क्या सकता था बंदा खांस लेने के सिवा।’

झबरी मूंछों तले एक पान सरकाकर मौलाना बोले, ‘ऊपर से ये न्यूजें और भुस में लाठी मार रही हैं। छापा है कि पूर्व फौजी तानाशाह ऑफ पाकिस्तान ने कहा है कि जान जाए तो जाए, वतन जरूर लौटूंगा। जरूर लौटो साहब। विरोध की हांडी का पुलाव स्वागत को तय्यार है। परोसने की देर है।’

पान का बकाया एक तरफ डिपाजिट करके लादेन बोले, ‘भाई मियां, मुझे पाकिस्तानी शायर अहमद फराज का शेर याद आता है, ‘रंजिश ही सही, दिल को जलाने के लिए आ..आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ।’ अलबत्ता एक डर है दिल में, तालिबान और दीगर आतंकवादी समूहों का। फिर भी गुर्दा देखिए कि बोले हैं कि अल्लाह के सिवा वे किसी से नहीं डरते। खुदा जाने फिर इतने दिनों भगोड़े बनकर लंदन में पालक का सूप क्यों पीते रहे? आपने फरमाया कि कई बार मौत को बहुत करीब से देख चुके हैं। अपनी या दूसरे बेगुनाहों की? आप बोले कि मैं देशवासियों के लिए कुछ अच्छा काम करना चाहता हूं। अच्छा काम मतलब? खुदा न करे कि दूसरे कारगिल में फिर मुंह की खाने का इरादा? माफ करना मियां, भेड़िए को भाई कह देने से वह चबाना नहीं छोड़ देता। आप तो मियां, जहां हो, वहीं खुश रहो।’

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