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दुश्मन नम्बर 1

वैसे तो लादेन पूरे संसार का अपराधी था, परन्तु उसने अमेरिका के 3000 नागरिकों को मार कर जो धूर्तता दिखाई थी, उससे वह अमेरिका का नम्बर वन दुश्मन बन गया था। अमेरिका ने उसको पकड़ने में कभी ढिलाई नहीं दिखाई और उसकी मेहनत रंग लाई। अंतत: दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी मारा गया। पाकिस्तान बार-बार अमेरिका से कहता रहा कि वे लादेन के बारे में नहीं जानता, जबकि पाकिस्तान ने ही इस दरिंदे को पनाह दे रखी थी। भारत में तबाही मचाने वाला दाऊद भी पाकिस्तान में आश्रय लिए बैठा है, पर भारत उसे पकड़ नहीं पाया। प्रश्न उठता है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होता है या निजी स्वार्थ? विश्वास नहीं किया जा सकता कि भारत जैसा 121 करोड़ की आबादी वाला देश दाऊद को न मार पाए। अमेरिका द्वारा लादेन को पाकिस्तान में जाकर उसे न केवल मार गिराने से, बल्कि उसकी लाश, उसके बीवी-बच्चों को साथ ले जाने से अब भारत सरकार पर भी दबाव बनना शुरू हो गया है कि हमारी सरकार पाकिस्तान जाकर दाऊद की लाश एवं उसके बीवी-बच्चों को भारत में लाए।
विनय चोपड़ा, देहरादून

महंगी शिक्षा
आज हर क्षेत्र में दिखावे का बोलबाला है। जहां सरकार मुफ्त शिक्षा के दावे कर रही है, वहीं जनता उस मुफ्त होती शिक्षा से खफा नजर आती है। प्राथमिक सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई, फीस से लेकर कॉपी-किताबें और खाना सब कुछ मुफ्त दिया जा रहा है, परन्तु जनता है कि उसे विद्यालय न मानकर भोजनालय मानने पर उतारू है, वहीं दूसरी ओर यदि प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो जनता कम फीस वाले नजदीकी स्कूलों में जाने से कतराती है। उन्हें महंगी फीस और नाम चाहिए, भले ही शिक्षा का ग्राफ शून्य हो। आखिर क्यों जनता खुद महंगी शिक्षा को बढ़ावा देती है? भले ही इन्हें घर से बच्चों को दस किलोमीटर दूर तक भेजना पड़े।
अश्विनी गौड़, कुमाऊं

विश्वविद्यालय की मनमानी
कुमाऊं विश्वविद्यालय में परीक्षार्थी परेशान हैं और प्रशासन मस्त है। परीक्षाओं की शुरुआत में कई परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र से वंचित रहना पड़ा। जैसे-तैसे 10 रुपये देकर डुप्लीकेट प्रवेश पत्र बनवाया गया और अब एक ही परीक्षार्थी को दो-तीन रोल नम्बर देने का मामला सामने आया है। यह सब बताता है कि विश्वविद्यालय में किस तरह का प्रशासन कार्य कर रहा है और उसकी कार्य संस्कृति कैसी है। केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने की बात हो रही है, मगर पिछले 10 वर्षों में विश्वविद्यालय को लापरवाह प्रशासन मिला है, जिसका खामियाजा हमेशा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। सूचना प्रसारण के इस दौर में विश्वविद्यालय का कंप्यूटर विभाग बेहद सुस्त है। इन सब कमियों के बाद विश्वविद्यालय समय पर यदि परिणाम घोषित कर दे तो अपने-आप में एक उपलब्धि होगी और विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को नहीं भरना पड़ेगा।
पूरन चन्द्र पाण्डे, रामनगर

भ्रष्टाचार का विरोध सीखें
आजाद भारत 63 साल का हो गया है, परंतु पिछले कुछ सालों में राजनीति का जो भ्रष्ट रूप सामने आया है वह वाकई शर्मसार करने वाला है। एक ओर देश में ऐसा मजदूर है जो दिनभर अपना शरीर तोड़कर मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुटाता है, तो दूसरी ओर हमारे द्वारा चुने गए सत्ताधारी करोड़ों का घोटाला करके भ्रष्ट राजनीति की रोटियां बाइज्जत सेंकते हैं। पंचायत स्तर पर मनरेगा या गौरा देवी कन्या धन योजना से लेकर केन्द्र स्तर पर 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले तक भ्रष्टाचार राजनीति की नस-नस में रच-बस गया है। ऐसे में सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हो।
रेखा पटवाल, श्रीनगर गढ़वाल

 

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