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खूबसूरती की मेडिकल डोज

खूबसूरती कभी खुदा की नेमत रही होगी, पर आज ये ब्यूटी क्लीनिक्स में जाकर आसानी से हासिल की जा सकती है। कभी इस पर केवल महिलाओं का कब्जा रहा होगा, आज पुरुष भी इसके हकदार बन रहे हैं। वह भी चालीस पार के पुरुष। कोई अपनी बढ़ती उम्र को पीछे धकेलने के लिए इंजेक्शन ले रहा है तो कोई पेट पर से चर्बी घटाने के लिए सर्जरी करा रहा है। वजह यह कि बेटे की शादी में सुंदर दिखना है या फिर कॉरपोरेट मीटिंग में युवा नजर आना है। इसके लिए वे दर्द सह रहे हैं और हजारों की कीमत भी चुका रहे हैं। इस ट्रेंड, इसके फायदों, खतरों और सावधानियों पर अरशाना अजमत की रिपोर्ट।

आप अपने शहर के किसी नामचीन ब्यूटी क्लीनिक जाइए! आपको वहां मिस्टर ए अपने माथे की तीन लकीरें मिटवाने के लिए इंजेक्शन लगवाते मिलेंगे। मिस्टर बी अपने पेट का फैट गलवाने के लिए सर्जरी करवाते मिलेंगे। मिस्टर सी अपनी आंखों के इर्द-गिर्द जमी झुर्रियों में फिलर की परत चढ़ाते मिलेंगे। यहां ए, बी या सी की जगह दूसरे लोग हो सकते हैं। मगर समस्याएं और समाधान सबके एक से होंगे। समस्याएं कुछ ऐसी हैं.. चेहरे या शरीर के दूसरे हिस्से पर अतिरिक्त चर्बी चढ़ गई है, जो देखने में भद्दी लगती है, आंखों के नीचे की त्वचा झूलने लगी है या झाइयां सी हो गई हैं, जिससे उम्र कई साल ज्यादा लगती है, माथे पर तीन ऐसी लकीरें पसर गई हैं, जो देखने वाले को हमेशा गुस्से में होने का अहसास कराती हैं। समाधान कुछ इस तरह के हैं.. बोटोक्स के इंजेक्शन लेकर माथे की लकीरों को सदा के लिए मिटाया जा सकता है। फिलर आजमाने से त्वचा में कसाव आ जाता है। लाइपोसेक्शन कराने से अतिरिक्त चर्बी कुछ घंटों में गल जाती है।

मैक्स हेल्थ केयर के इंस्टीटय़ूट ऑफ एस्थेटिक एण्ड रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के डायरेक्टर डॉक्टर सुनील चौधरी कहते हैं,‘खूबसूरती की ये मेडिकल तकनीक पहले भी थीं, लेकिन तब इनका इस्तेमाल एक्टर, मॉडल या हाई-प्रोफाइल लोग करते थे। या फिर महिलाएं इन्हें आजमाती थीं। नया ट्रेंड यह है कि चालीस पार के मध्यमवर्गीय पुरुष इन तकनीकों का इस्तेमाल करके खूबसूरत बन रहे हैं।’ इसके लिए वे अस्पतालों या ब्यूटी सेंटरों में जाकर कॉस्मेटिक सर्जन की मदद ले रहे हैं। ऐसा केवल दिल्ली जैसे महानगर में नहीं हो रहा। भारत के बी-टाउन वासी मसलन लखनऊ, कानपुर, आगरा मेरठ के लोग भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

मेरठ स्थित लॉरेट ब्यूटी पार्लर की सर्वेसर्वा नविता जैन कहती हैं,‘पार्लर आने वाला हर तीसरा ग्राहक चालीस के ऊपर का कोई पुरुष होता है, जो बोटोक्स जैसे इंजेक्शनों की मदद से अपना माथा सपाट करना चाहता है। फिलर के इंजेक्शन लगवा कर मुस्कराहट संवारता है, मशीनों की सहायता से चेहरे का अतिरिक्त फैट गलवाता है या लेजर थेरेपी से चेहरे के अतिरिक्त बाल हमेशा के लिए हटवा देता है।’ नौकरीपेशा से लेकर बिजनेस क्लास तक के लोग इन थेरेपीज की मदद से खूबसूरत बन रहे हैं। ऐसा करने के लिए उनके पास कई वजहें हैं। आगरा स्थित ब्यूटीसेंटर जस्ट सोनिया 001 की संचालिका सोनिया कहती हैं, ‘कोई इसलिए इन थेरेपीज का इस्तेमाल करता है, क्योंकि उसे कॉरपोरेट मीटिंग में युवा दिखना है। कोई इसलिए इनका इस्तेमाल करता है, क्योंकि उसे बेटे की शादी की तस्वीरों में सुंदर दिखना है।

सुंदर दिखने की मध्यमवर्गीय पुरुषों की ये कवायद काफी अच्छी है, मगर चिंता की बात यह है कि खूबसूरती की ललक में वे कई बार कुछ गलतियां भी कर देते हैं। ऐसी गलतियां जो उनकी सेहत के लिए भारी हो सकती हैं। डॉक्टर सुनील कहते हैं, ‘कई लोग विज्ञापन वगैरह पढ़ कर ऐसे ब्यूटी सेंटर चले जाते हैं, जहां कोई कॉस्मेटिक सजर्न या डर्मेटोलॉजिस्ट नहीं होता, बल्कि ब्यूटी एक्सपर्ट खुद ही इन तकनीक की मदद से लोगों की समस्याएं दूर करते हैं। ऐसे लोग अक्सर कठिन समस्याओं का शिकार हो जाते हैं।’ डॉक्टर सुनील की मानें तो केवल डर्मेटोलॉजिस्ट या कॉस्मेटिक सर्जन को ही अधिकार है कि वह बोटोक्स, फिलर के इंजेक्शन दे सके या लाइपोसेक्शन थेरेपी दे सके। दरअसल इनमें कई तरह की बारीकियों का ध्यान रखना होता है। मसलन अगर बोटोक्स का इंजेक्शन दिया जा रहा है तो हर मरीज के हिसाब से उसकी डोज तय होती है। डॉ. सुनील कहते हैं,‘अगर डोज गलती से ज्यादा हो गई तो मरीज को पैरालिसिस तक हो सकता है।’
इसी तरह से सर गंगा राम अस्पताल के कॉस्मेटिक सर्जन विवेक कुमार की मानें तो लाइपोसेक्शन करते समय जरा सी चूक शरीर में फैट को असंतुलित कर सकती है। इसलिए केवल एक्सपर्ट की राय से ही इन तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। 

इसी तरह से इन तकनीकों के इस्तेमाल के बाद कई खास सावधानियों की दरकार होती है, तभी इनका असर देर तक टिकता है। डॉक्टर विवेक कहते हैं,‘एक्सपर्ट डायट में कई तरह के बदलाव बताते हैं, जिनका पालन बहुत जरूरी होता है। जैसे जितने विटामिन और कैलोरी बताई जाएं, उतनी ही लेनी चाहिए। इसी तरह से लाइपोसेक्शन लोग मोटापे से निजात के लिए करते हैं। तो खान-पान में कुछ चीजों से परहेज करना होता है।’

अगर इस तरह की एहतियात बरती जाएं तो ये तकनीक काफी फायदेमंद रहती हैं और देर तक टिकती हैं। लेकिन अगर थोड़ी-बहुत चूक हो जाए तो इन सारे ट्रीटमेंट के कई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। सोनिया बताती हैं कि ऐसा नहीं है कि ये ब्यूटी ट्रीटमेंट पूरी तरह से नुकसान रहित हैं। वह कहती हैं, ‘हर तरह की कॉस्मेटिक सर्जरी के देर-सबेर साइड इफेक्ट होते हैं। इन ट्रीटमेंट के साथ भी ऐसा ही है।’ कई लोग कभी-कभार ही इनका इस्तेमाल करते हैं, जैसे ढलती उम्र में दो से तीन बार तो उन्हें नुकसान नहीं होता। लेकिन कई लोग कम उम्र जैसे 35 साल से ही इनका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं और अक्सर ये ट्रीटमेंट लेते हैं। ऐसे लोगों को कई तरह के साइड इफेक्ट हो सकते हैं। सोनिया बताती हैं कि कई बार जिस हिस्से पर ट्रीटमेंट दिया गया है, उसके आस-पास की त्वचा संक्रमित हो जाती है। त्वचा पर लाली आ जाती है। छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं। त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है।

ये हैं सबसे ज्यादा लोकप्रिय ट्रीटमेंट

बोटोक्स के इंजेक्शन: इन्हें मसल्स में लगाया जाता है। इनका इस्तेमाल त्वचा पर उभरी लकीरों-झुर्रियों को मिटाने के लिए किया जाता है। इससे उम्र कम लगने लगती है। 18 से 65 साल के लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। असर थोड़े समय के लिए होता है।

लेजर थेरेपी: एक्ने ट्रीटमेंट, त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने, गड्ढे मिटाने के लिए मशीनी किरणों का इस्तेमाल किया जाता है। चेहरे से अतिरिक्त बाल हटाने के लिए भी इस ट्रीटमेंट का इस्तेमाल होता है। सावधानियां बरती जाएं तो लंबे वक्त तक इसका असर रहता है।

फिलर्स: ये भी एक तरह के इंजेक्शन होते हैं, जो त्वचा में कसाव लाने और झुर्रियां मिटाने के लिए लगाए जाते हैं। ये बोटोक्स से इस मायने में अलग होते हैं कि ये त्वचा की ऊपरी सतह को छूते हैं, अंदर तक नहीं जाते।

लाइपोसेक्शन: मोटापे से परेशान लोग इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें छोटी सी सर्जरी के जरिए पेट या शरीर के दूसरे हिस्सों के फैट को गलाया जाता है।

अगर आप ले रहे हैं ये ट्रीटमेंट
अगर आप इनमें से कोई ट्रीटमेंट लेने जा रहे हैं तो कुछ बातों का खास खयाल रखें। जैसे किसी कॉस्मेटिक सर्जन की सलाह से ही अपनी स्किन पर किसी इंजेक्शन का इस्तेमाल करें। केवल ब्यूटी एक्सपर्ट की राय काफी नहीं है। सस्ते के चक्कर में न पड़ें। जानी-पहचानी जगहों से ही ट्रीटमेंट लें। ट्रीटमेंट लेने से पहले डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री से अवगत कराएं। कुछेक ऐसी बीमारियां हैं, जिनके रोगियों को इन ट्रीटमेंट्स से परहेज करना चाहिए। कार्डियोवैस्कुलर और न्यूरोमस्कुलर ऐसी ही बीमारियां हैं।

हजारों का खेल है यह
जाहिर है जो थेरेपी आपके चेहरे का नक्शा संवार देगी, वह सस्ते में हासिल नहीं होगी। इसके लिए भारी कीमत भी चुकानी होती है। शहर के हिसाब से खूबसूरती का खर्च अलग-अलग हो सकता है, मगर सस्ती यह कहीं नहीं है। मसलन दिल्ली में जहां आपको इनमें से किसी एक ट्रीटमेंट के लिए 50 हजार तक खर्च करने पड़ सकते हैं वहीं आगरा में एक ट्रीटमेंट की कीमत 25 हजार के लगभग होगी। लखनऊ, बरेली, गोरखपुर, मेरठ और कानपुर में भी इन ट्रीटमेंट्स की कमोबेश यही कीमतें हैं।

 

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