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हाईकोर्ट ने दिल्ली के ऑटो चालकों को दी राहत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी जिसमें राजधानी की सड़कों पर ऑटो चलाने वाले चालकों से उनके वाहन में जीपीएस लगवाने के लिए 15,000 रुपये की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति इंदरमीत कौर ने राज्य सरकार के अंतरिम आदेश पर 27 मई तक के लिए रोक लगा दी है। सरकार ने प्रत्येक ऑटो चालकों को अपने वाहन में जीपीएस तकनीक लगवाने के लिए अधिसूचना जारी की थी।

कौर ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

अदालत ने कहा, ''अधिसूचना में से पैसा देने की अनिवार्यता को हटाया जाना चाहिए।'' अदालत ने यह भी कहा कि ऑटो चालक दिहाड़ी मजदूर हैं और इससे उनकी आजीविका प्राभावित होगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल उन ऑटो चालकों पर लागू होगा जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

अधिवक्ता प्रवीण अग्रवाल के माध्यम से लगभग 200 ऑटो चालकों द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि सरकार का निर्णय उनकी जीविका के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अग्रवाल ने मंगलवार को अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ऑटो चालकों को डीआईएमटीएस (दिल्ली इंटिग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम) से ही जीपीएस तकनीक लगवाने के लिए बाध्य कर रही है। डीआईएमटीएस से जीपीएस लगवाने में 15,000 रुपये जबकि उसी तकनीक को दूसरी जगह लगवाने में केवल 3,000 से 5,000 रुपये का खर्च आ रहा है।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अधिसूचना के जिस खंड में पैसे की मांग की गई है उसे हटाया जाना चाहिए।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 मई की तारीख निर्धारित की है।

 

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