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कलाम ने दूसरी हरित क्रांति पर जोर दिया

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सोमवार को कहा कि बिहार के पालीगंज से ही दूसरी हरित क्रांति होगी, क्योंकि यहां के किसानों ने अनाज उत्पादकता में क्रांति लाने में प्रमुखता से योगदान दिया है। राजधानी पटना से 55 किलोमीटर दूर पालीगंज में कलाम ने कहा कि 1999 में आप लोगों ने 2.4 हेक्टेयर भूमि से शुरूआत की थी और 2004 में यह 2000 हेक्टेयर पहुंच गयी।

इस अवधि में आपने ठोस कृषि नीतियों, गुणवत्तापूर्ण बीजों के उपयोग और अन्य सामग्रियों के योगदान से बता दिया कि चावल और गेहूं की उत्पादकता पांच वर्षो की अवधि में दोगुने से भी अधिक बढाये जा सकते है। इससे पहले कलाम ने स्थानीय किसानों के सहयोग से बाल्मिकी शर्मा के नेतृत्व में बनी एक समिति द्वारा स्थापित एक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। किसानों ने अपनी समिति का नाम पालीगंज वितरण समिति रखा है।

बाद में मिसाइल मैन ने स्थानीय लिटिल फ्लावर स्कूल के बच्चों से मुलाकात की और उन्हें विचारों में परिवर्तन को धरातल पर उतारने की शपथ दिलाई। बच्चों ने पूर्व राष्ट्रपति को फूल भेंट किये। उन्होंने कहा कि पालीगंज के किसानों ने जो मुहिम चालू की है वह जारी रहनी चाहिए और बिहार को देश का अन्नागार बनाने की जरूरत है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में अभी प्रतिवर्ष 23 करोड़ टन अनाज का उत्पादन होता है, जिसे बढाकर 2020 तक 34 करोड़ टन करना होगा। इसके लिए भारत में दूसरी हरित क्रांति लाने की दरकार है, तभी हम यह विशाल लक्ष्य हासिल करने में सफल रहेंगे।

कलाम ने कहा कि उत्पादकता में बढोतरी से हम कई बाधाओं से पार पाने में सफल होंगे। बढ़ती आबादी की जरूरतों के साथ पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियां ऐसी हैं, जिससे हम ऐसी परिस्थिति में पहुंच जायेंगे, जहां मौजूदा 17 करोड़ हेक्टेयर खेती योग्य भूमि पूरी तरह उपलब्ध नहीं होगी।

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