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रिजर्व बैंक ने पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाने को कहा

रिजर्व बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के खुदरा मूल्य नहीं बढ़ाए जाने पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इस तरह का असंतुलन तुरंत दूर करने की जरूरत है।
  
बैंक का कहना है कि ऐसा न किया गया तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ जाएगा और इसका असर राजकोषी घाटे और मुद्रास्फीति का दबाव और बढेगा। रिजर्व बैंक गवर्नर डी़ सुब्बाराव ने कहा कच्चे तेल की मौजूदा कीमत को देखते हुये यह मानकर चलना कि पेट्रोलियम और उर्वरक सब्सिडी सीमित दायरे में रहेगी, काफी चुनौतीपूर्ण होगी। सुब्बाराव ने कहा, हालांकि, पेट्रोलियम पदार्थों की खुदरा कीमतें बढ़ने से अल्पकालिक अवधि में मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा, फिर भी रिजर्व बैंक का मानना है कि यह काम जितनी जल्दी हो सके कर लिया जाना चाहिये।
   
वर्ष 2011-12 की मौद्रिक एवं लोन नीति जारी करते हुये उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ने की स्थिति में सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है।
   
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पिछले साल जून के बाद से डीजल के दाम बढ़ाने की अनुमति नहीं दी है। उस समय कच्चे तेल का दाम 72-73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर चल रहे थे। इस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्चस्तर पर है। इस लिहाज से डीजल की खुदरा कीमतों में 18 रुपये प्रति लीटर वृद्धि की जरुरत है।

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