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दहशत का मास्टरमाइंड

दहशत का मास्टरमाइंड

सऊदी अरब के एक अरबपति परिवार में जन्मा ओसामा बिन लादेन आखिरकार अमेरिकी बलों की कार्रवाई में रविवार को मारा गया। उसने इतिहास के सबसे बर्बर आतंकी नेटवर्क के सरगना के बतौर अमेरिका के खिलाफ एक स्वघोषित जिहाद छेड़ रखा था। वह 53 वर्ष का था।

अलकायदा के संस्थापक के बतौर वह बेहद शक्तिशाली था। आतंकी कार्रवाइयों के लिए उसकी पूरी दुनिया में पहुंच थी। वह एक तरफ सदियों पुरानी इस्लामी मान्यताओं से अच्छी तरह वाकिफ था तो दूसरी तरफ आधुनिक दौर की समर्थ टेक्नोलॉजी उसके पास थी। उसने जिन चरमपंथियों को प्रेरित किया, उन्होंने खुद को आश्चर्यजनक रूप से लचीला साबित किया और उसने जिस संगठन की स्थापना की, वह लगातार अमेरिकी हितों के लिए उसके घर में और उसके बाहर भी प्रभावी रूप से खतरा बना रहा।

हालांकि बिन लादेन वर्षो से अमेरिका की अत्यंत सतर्क निगाहों से बच निकलने में कामयाब होता रहा था, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से कमजोर होती जा रही थी। उसकी इस हालत के पीछे उसके कई वरिष्ठ सहयोगियों की गिरफ्तारी या मौत अहम कारण थी। उसका हिंसक अभियान कभी अपने मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब नहीं पहुंच सका। उसका मुख्य मकसद था अमेरिकी बलों को पश्चिमी एशिया से निकालना और अमेरिकी समर्थन वाली काहिरा और रियाद की सरकारों को हटाकर उनकी जगह सख्त इस्लामी कानूनों वाली सरकारों को सत्तासीन करना।

एक धनी सऊदी अरबी परिवार में पले बढ़े बिन लादेन के बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह आगे चलकर इस्लामी चरमपंथ का सरगना बनेगा और दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी बनेगा। जिंदा या मुर्दा, बिन लादेन के सिर पर 2.5 करोड़ डॉलर का पुरस्कार था। हालांकि जब वह किशोर था तभी पहली बार उसका परिचय कट्टरपंथी इस्लामी शिक्षा  से हुआ, मगर उस समय वह राजनीतिक से अधिक मजहब में रुचि रखने वाला एक युवा था। एक ऐसा युवा, जो लंबा और संकोची दिखता था और अपने कई बंधुओं की तरह  विशाल घरेलू निर्माण व्यवसाय में शामिल होने की इच्छा रखता था।

1980 के दशक में उसने अफगानिस्तान में सोवियत कब्जे के खिलाफ एक अरब दस्ते का नेतृत्व किया, जहां से उसके भीतर आक्रामकता  का विचार बढ़ना शुरू हुआ। 1990 में कुवैत पर ईराक  के हमले के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना का प्रवेश हुआ। इस घटना के संदर्भ में बिन लादेन ने अमेरिका को एक वर्चस्ववादी शक्ति के बतौर देखा और उसे इस्लाम के लिए खतरा माना। इसके साथ ही वह अपनी शिथिल पड़ी जिहाद की मुहिम  के घेरे में आतंकी तत्वों को एकजुट करने में जुट गया। इस काम में उसे सफलता भी मिली। जल्द ही उसकी अमेरिका विरोधी और धार्मिक मसीहा जैसी छवि को मुस्लिम जगत में काफी लोकप्रियता प्राप्त हुई।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया के चतुराई भरे इस्तेमाल की बदौलत उसने पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ हिंसक प्रतिवाद और इस्लामी शासन की बहाली का अपना संदेश पूरी दुनिया में फैलाया।  अमेरिका सरकार ने पहली बार बिन लादेन को एक खतरे के बतौर 1990 के दशक के मध्य में पहचाना, जब कई भीषण हमलों के पीछे उसका नाम आया। ऐसे हमलों में 1998 में  केन्या और तंजानिया स्थित अमेरिकी दूतावासों पर हुए आत्मघाती हमले और 2000 में यमन में यूएसएस कोल पर हुए हमले प्रमुख थे। इसके बाद सऊदी सरकार ने बिन लादेन की नागरिकता खत्म कर दी। ऐसे में वह सूडान चला गया। वर्ष 2001 में उसने अमेरिका पर हमले की साजिश रची, जो 11 सितंबर के वर्ल्ड ट्रेड टावर और पेंटागन पर हमले के रूप में पूरी दुनिया ने देखा। इसके बाद से अमेरिका ने उसके खिलाफ लगातार अभियान जारी रखा।

अफगानिस्तान पर अमेरिकी नेतृत्व में किए गए हमले से बिन लादेन को करारा झटका लगा। अलकायदा के लड़ाके मारे गए और उसके काफी शिविर नष्ट कर दिए गए। तोरा बोरा की पहाड़ियों पर जबरदस्त बमबारी के बाद बिन लादेन ने 14 दिसंबर 2001 को हस्ताक्षरित वसीयतनामा जारी किया था, जिसमें उसकी थकान और मायूसी झलक रही थी। लेकिन वह उस हमले में बाल-बाल बच गया और माना जाता है कि पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में कबायली इलाके में छिप गया।

वक्त बीतने के बाद उसका आत्मविश्वास फिर से जग गया। उसके स्वास्थ्य के बारे में लगातार अफवाहें उड़ती रहीं, यह भी बताया जाता था कि उसके गुर्दे बेकार हो चुके हैं। लेकिन बार-बार वह अपने समर्थकों का उत्साह बढ़ाने के लिए वीडियो संदेश जारी करके इन अफवाहों को झुठलाता रहा। उसने 2010 तक अपने गुप्त पनाहगाहों से कुल 40 संदेश जारी किए। उसे वीडियो में जैकेट पहने और साफा बांधे तथा बगल में एक रायफल रखे दिखाया जाता था।

छह फुट से भी ज्यदा लंबा यह दाढ़ीधारी शख्स अमेरिका के खिलाफ अपने अभियान की वजह से हर जगह जाना जाने लगा। वह अपने कारनामों के बारे में बताता और मुसलमानों को सभ्यता के संघर्ष में अपना साथ देने के लिए प्रेरित करता था।  बिन लादेन ने ऐलान किया कि वह मुसलमानों को एक ऐसे खिलाफत (नेतृत्व) के अधीन देखना चाहता है जिसकी सीमाएं इंडोनेशिया से स्पेन तक फैली हों। 

फलस्तीन और इराक के मुद्दों पर मुसलमाने के गुस्से के मद्देनजर अमेरिका की तीखी आलोचना करके मानो उसने मुसलमानों की भावनाओं को व्यक्त किया। उसने पश्चिम एशिया की सरकारों को भ्रष्ट और तानाशाह बताकर उनकी आलोचना की। उसने इस्लाम के अतीत के प्रतीकों का सहारा लेकर एक के बाद एक विदेशी ताकतों की गुलामी से त्रस्त देशों के लोगों को गौरवान्वित महसूस कराया। वह बार-बार कुरान का हवाला देता था और मुसलमानों को शहादत के लिए प्रेरित करता था।

इराक पर हमले के बाद बिन लादेन ने 2003 और 2004 में अपने कुछ सबसे लंबे लेख लिखे, लेकिन 2004 में बुश की दोबारा जीत के बाद करीब तीन साल तक खामोश बैठ गया। सितंबर 2007 में बिन लादेन ने 25 मिनट का एक वीडियोटेप जारी करके पश्चिमी पूंजीवादी की जबरदस्त आलोचना की और उसमें उस समय की खबरों, सांस्कृतिक और राजनैतिक शख्सियतों का भी जिक्र था, जिससे यह अंदाजा लगता था कि वह समसामयिक मामलों से अच्छी तरह वाकिफ है। बाद में 2007 के एक अन्य वीडियोटेप में उसने पाकिस्तान और अमेरिका के यूरोपीय साङीदारों को निशाना बनाया। बराक ओबामा के 2008 में राष्ट्रपति बनने के बाद भी बिन लादेन ने अमेरिका की आलोचना में कमी नहीं की।

ओसामा के पिता मोहम्मद बिन लादेन यमन के हजरामावत इलाके से 1925 में एक युवक के रूप में निर्धन मजदूर के तौर पर सऊदी अरब पहुंचे थे। ऊर्जावान और उद्यमी मोहम्मद बिन लादेन को इंजीनियरिंग में दिलचस्पी थी और उन्होंने कंस्ट्रक्शन के कारोबार में कदम रखा। उन्होंने 1930 के दशक के आखिर तक अपनी कंपनी खड़ी कर ली और शाही परिवार के महल बनाने लगे। इसी दौरान जब सऊदी अरब ने तेल के पैसे से बड़ी-बड़ी परियोजनाएं शुरू की, तो मानो उनकी किस्मत खुल गई। मोहम्मद बिन लादेन ने जब 1956 में 14 वर्षीया आलिया अल गनेम से विवाह किया तब उससे पहले उनकी कई पत्नियां और एक दर्जन से ज्यादा बच्चों थे। अल गनेम सीरिया के एक किसान की बेटी थी। 1958 के शुरू में अल गनेम ने एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम ओसामा यानी छोटा शेर रखा गया।

ओसामा के दोस्तों और रिश्तेदारों का कहना है कि वह बचपन में शांत और संकोची स्वभाव का था और घुड़सवारी उसका पसंदीदा शौक था। तलाक और सौतेले पिता के साथ जीवन गुजारने के बावजूद ओसामा बिन लादेन परिवार का सम्मानित सदस्य था। वह सप्ताहांत में अपने पिता के घर जाता था और बिन लादेन परिवार के साथ बाहर घूमने जाता था। उसने अपने सौतेले भाइयों के साथ शिक्षा हासिल की। 1967 में मोहम्मद बिन लादेन की एक हवाई दुर्घटना में मौत के बाद वह बिन लादेन परिवार के साथ शोक मना रहा था।

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