DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अमेरिकी अभियान में पाक ने भी दिया साथ

अमेरिकी अभियान में पाक ने भी दिया साथ

यह एक विडंबना ही है। आखिरकार ओसामा बिन लादेन की कहानी का अंत अफगानिस्तान के किसी जंगल में नहीं बल्कि पाक के सामरिक शहर एबटाबाद में हुआ जो पाकिस्तानी फौज के मुख्यालय रावलपिंडी से महज 50 किलोमीटर दूर है। हमें इसमें जरा भी शंका नहीं होनी चाहिए कि लादेन को मिटाने के लिए यह अभियान पाकिस्तान और अमेरिका के विशेष सुरक्षा बलों ने मिलकर चलाया।

यह दावा कि इतना बड़ा अभियान अमेरिका ने अपने बलबूते किया, कुछ हजम नहीं होता। एबटाबाद, चीन जाने वाले कराकोरम हाईवे का ‘संवेदनशील’ द्वार है। और पाकिस्तानी एजेंसियों की मदद के बिना अमेरिका को यह खुफिया जानकारी भी नहीं मिल सकती कि लादेन एबटाबाद से गुजर रहा था।

इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने आखिरकार लादेन को मिटाने की क्यों ठानी? हर वजह इस सवाल के जवाब में ही छुपी है। जाहिर है कि पाकिस्तानी फौज ने आकलन किया होगा कि इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मदद करने से उन्हें बहुत कुछ हासिल होगा। इस घटना से अफगान युद्ध की समाप्ति की शुरुआत हो गई है। लादेन की हत्या के जरिये पाकिस्तानी फौज ने एक विश्वस्त सहयोगी के तौर पर अपनी परीक्षा दे दी है।

अमेरिका और पाकिस्तान की इस जुगलबंदी के इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्या मायने हैं? पहला तो यह कि ओबामा प्रशासन अफगानिस्तान के बारे में खुलकर नीति तय कर सकेगा क्योंकि अमेरिका वहां नाटो तथा अपनी फौज की दीर्घकालिक तैनाती चाहता है। दूसरे, अमेरिका की विदेश नीति की वरीयता अब पश्चिम एशिया पर केंद्रित हो रही है। वहां ‘पश्चिम परस्त’ शासन की हिफाजत में पाक अहम भूमिका निभा सकता है। तीसरे, अमेरिका की एकतरफा हस्तक्षेप की नीति को भी इससे बल मिलेगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अमेरिकी अभियान में पाक ने भी दिया साथ