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भ्रष्टाचार मामले में मुख्य संसदीय सचिव को सजा

भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री और पंजाब के मौजूदा मुख्य संसदीय सचिव सोहन सिंह ठंडल को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह पहला मामला है जब पंजाब की वर्तमान सरकार के किसी सदस्य को मामले में दोषी ठहराया गया है।

विशेष न्यायाधीश राजिंदर अग्रवाल ने होशियारपुर जिले के माहिलपुर से शिरोमणि अकाली दल के विधायक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। कृषि विभाग मामलों से जुड़े मुख्य संसदीय सचिव ठंडल के खिलाफ पूर्व अमरिन्दर सिंह सरकार ने आठ साल पहले मामला दर्ज कराया था।

राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस ने ठंडल को तत्काल उनके पद और अकाली दल की सदस्यता से बर्खास्त करने की मांग की है। अदालत ने सोमवार को आदेश जारी करते समय कहा कि यदि ठंडल जुर्माना अदा नहीं करते तो उन्हें चार महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास काटना होगा।

ठंडल ने 25 हजार रुपए की जमानत राशि और इतनी ही राशि का मुचलका जमा किया। विशेष न्यायाधीश ने इस पर उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान कर दी और सजा को एक जून तक स्थगित करने का आदेश दिया, ताकि वह अपनी दोषसिद्धि को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकें।

न्यायाधीश ने कहा कि मेरे हिसाब से इस मामले में आरोपी की संपत्ति और आय के ज्ञात स्रोतों के बीच तीन लाख 62 हजार 700 रुपए का अंतर है जबकि उनकी कुल आय 31 लाख 46 हजार 254 रुपए है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि उन्होंने दावा किया है कि उनकी आमदनी का 40 प्रतिशत हिस्सा घरेलू जरूरतों में खर्च हो जाता है और यहां तक कि उनके द्वारा बताई गई ऋण के लेन-देन की बात को भी अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

न्यायाधीश ने कहा कि इसके अतिरिक्त फाइल में दिए गए सबूतों से पता चलता है कि उनके मकान की तलाशी के दौरान 99 हजार 680 रुपए मूल्य की अमेरिकी मुद्रा बरामद हुई जिसका जिक्र अभियोजन द्वारा दायर आरोप पत्र में नहीं किया गया है।

अग्रवाल ने 29 पेज के अपने फैसले में कहा कि इन परिस्थितियों के तहत यह अदालत फाइल में दिए गए सबूत से संतुष्ट है। यह साबित हो गया है कि आरोपी ने आपराधिक कदाचार का अपराध किया है क्योंकि उसकी संपत्ति़-खर्च उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है और वह इस बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

न्यायाधीश ने कहा कि मेरा मानना है कि इसमें नरमी बरते जाने का कोई आधार नहीं है। भ्रष्टाचार एक ऐसा रोग है जिसने समूची जन प्रशासन व्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के प्रतिनिधि का भ्रष्टाचार में लिप्त होना एक गंभीर अपराध है।

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