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सपनों की सुरक्षा

सपनों की सुरक्षा

भारत में बीमा क्षेत्र एक खुला बाजार बन चुका है। कंपनियां ग्राहकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। यही वजह है कि सार्वजनिक तथा निजी, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से करियर के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इंडस्ट्री में संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह

आर्थिक उदारीकरण के दौर में भारतीय इंश्योरेंस इंडस्ट्री में अन्य इंडस्ट्री की तुलना में अपेक्षित विकास देखने को मिला। इसने न सिर्फ लोगों को सुरक्षा के साये का एहसास कराया, बल्कि हजारों की संख्या में रोजगार एवं अन्य संभावनाएं भी पैदा कीं। पहले इस सेक्टर के बारे में लोगों में कई तरह की भ्रांतियां थीं, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की मानसिकता में बदलाव आया और इंश्योरेंस लोगों की जरूरत की चीज बनने लगा। जैसे-जैसे इंडस्ट्री ग्रोथ करती गई, उसी ढंग से बाजार में नए-नए कोर्स का भी चलन बढ़ा। नतीजा यह हुआ कि इंडस्ट्री को कुशल व क्षमतावान लोग मिलते गए। धीरे-धीरे यह डिमांड इतनी बढ़ी कि प्रोफेशनल्स कम पड़ने लगे। आज भी यह स्थिति बदस्तूर जारी है।

कोर्स

इंडस्ट्री का दायरा फैलने के साथ-साथ इंश्योरेंस व एक्चुरियल साइंस के कई कोर्स बाजार में आ गए, जबकि पहले ये कोर्स नहीं होते थे। अब जरूरी हो गया है कि छात्र की ट्रेनिंग सही दिशा में हुई हो, क्योंकि किसी भी कंपनी के पास इतना समय नहीं होता कि वह अनट्रेंड छात्र को बैठा कर सारे दांव-पेंच समझाए। इस प्रतिस्पर्धा के युग में उन्हें एक ट्रेंड प्रोफेशनल चाहिए, जो कि कंपनी के बिजनेस को बढ़ा सके। इसे ध्यान में रखते हुए पीजी डिप्लोमा, डिग्री व मास्टर कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इसमें एमबीए पाठय़क्रम को वरीयता दी जाती है। कुछ पाठय़क्रम निम्न हैं-

पीजी डिप्लोमा इन रिस्क एंड इंश्योरेंस मैनेजमेंट (एक वर्ष)
पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस साइंस (एक वर्ष)
बीएससी इन एक्चुरियल साइंस (तीन वर्ष)
बीए इन इंश्योरेंस (तीन वर्ष)
मास्टर प्रोग्राम इन इंश्योरेंस बिजनेस (दो वर्ष)
एमएससी इन एक्चुरियल साइंस (दो वर्ष)
एमबीए इन इंश्योरेंस (दो वर्ष)
एमबीए इन इंश्योरेंस एंड बैंकिंग (दो वर्ष)

एक्चुरियल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा करवाए जाने वाले कोर्स -

कोर टेक्निकल स्टेज
कोर एप्लिकेशन स्टेज
स्पेशलिस्ट टेक्निकल स्टेज
स्पेशलिस्ट एप्लिकेशन स्टेज

कोर्स के पश्चात कुछ संस्थाएं छात्रों को मेंबरशिप व फैलो मेंबरशिप प्रदान करती हैं-

दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई)
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ फाइनेंशियल एनालिस्ट ऑफ इंडिया (आईएफएआई)
एक्चुरियल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई)

एक अनुमान के मुताबिक सरकारी एवं निजी क्षेत्र में आने वाले 2-3 सालों में कम से कम 30,000 प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ेगी, जबकि स्टेट बैंक और बीएनपी की संयुक्त बीमा उद्यमी कंपनी एसबीआई लाइफ चालू वित्त वर्ष में करीब 1,000 कर्मचारियों की भर्ती करेगी। साथ ही अगले माह तक कंपनी की 75 नई शाखाएं खोलने की योजना है।

इंश्योरेंस सेक्टर स्थापित हो जाने के बाद इसमें एक्चुरियल साइंस भी आ जुड़ा। एक्चुरियल साइंस इंश्योरेंस एवं फाइनेंस इंडस्ट्री में सांख्यिकी एवं गणितीय विधियों द्वारा जोखिमों का आकलन करती है और उनका निवारण सुझाती है। एक्चुरी इंश्योरेंस बिजनेस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उत्पादों की वृद्धि को सूचीबद्ध करने, उत्पादों का मूल्य निर्धारण, जोखिम का आकलन तथा दायित्व प्रबंधन के लिए क्लेम तय करने का जिम्मा इन्हीं का होता है। इसके साथ ही वे एकेडमिक पर भी बल देते हैं। इंश्योरेंस सेक्टर में एक्चुरी के जुड़ने से यह फील्ड दिन-ब-दिन वृद्धि कर रही है। एक्चुरी बनने के लिए छात्र का एक्चुरियल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एआईएस) का फैलो मेंबर होना जरूरी है।

आज यह सेक्टर लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) एवं जनरल इंश्योरेंस (सामान्य बीमा) दो क्षेत्रों में काम कर रहा है। इस समय भारत में 24 जनरल इंश्योरेंस व 23 लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां काम कर रही हैं। इरडा द्वारा जारी एक आंकड़े के अनुसार प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां 22 प्रतिशत तथा गवर्मेट कंपनियां 21 परसेंट के हिसाब से सालाना ग्रोथ कर रही हैं।

फिक्की एंड बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की रिपोर्ट के अनुसार इंश्योरेंस इंडस्ट्री का प्रीमियम इनकम 2020 तक बढ़ कर 350-400 बिलियन के करीब हो जाएगा। आजकल बीमा कंपनियां अपने वर्करों को कमीशन व बोनस के अलावा लाइसेंस, ट्रेनिंग, ग्रुप इंश्योरेंस प्लान, ऑटोमोबाइल, ट्रांसपोर्टेशन प्लान आदि की सुविधाएं मुहैया करा रही हैं।

फैक्ट फाइल

प्रमुख संस्थान

एक्चुरियल सोसाइटी ऑफ इंडिया, मुंबई
वेबसाइट
- www.actuariesindia.org

एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस एंड एक्चुरियल साइंस, नोएडा
वेबसाइट
- www.amity.edu

बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
वेबसाइट
- www.bimtech.ac.in

नर्सी मोंजी इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
वेबसाइट
- www.nmisms.com

योग्यता

इसमें बारहवीं के बाद रास्ते खुलते हैं। एक्चुरियल सोसाइटी ऑफ इंडिया, मुंबई द्वारा कराए जाने वाले एंट्रेंस एग्जाम में सफल होने के पश्चात इंश्योरेंस इंडस्ट्री में करियर बनाया जा सकता है। एमबीए व एमएससी प्रोग्राम को इसमें खास तवज्जो दी जाती है।

एक्चुरियल साइंस में कोर्स करने के लिए न्यूनतम योग्यता 10+2 (85 प्रतिशत अंक मैथ्स व स्टेटिस्टिक्स में) निर्धारित की गई है। यदि कोई छात्र ग्रेजुएशन के पश्चात आना चाहता है तो उसके लिए मैथ्स/ इकोनॉमिक्स/ स्टेटिस्टिक्स/कम्प्यूटर साइंस में 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी आवश्यक है।

एक्सपर्ट व्यू/ प्रो. आरआर ग्रोवर
डायरेक्टर,एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस एंड एक्चुरियल साइंस, नोएडा

डिग्री ही नहीं, प्रेक्टिकल नॉलेज भी जरूरी

इस इंडस्ट्री में सफल होने के लिए सिर्फ डिग्री ही जरूरी नहीं है, बल्कि प्रेक्टिकल नॉलेज भी छात्र को होनी चाहिए। चूंकि यह टेक्निकल सब्जेक्ट है, इसलिए इसमें प्रेक्टिकल असाइनमेंट अधिक होते हैं। खासकर एक्चुरियल के छात्रों में कम्युनिकेशनल बिहेवियर व किसी प्रोजेक्ट पर उनमें ग्रुप में काम करने की आदत डाली जाती है, ताकि इंडस्ट्री में वह बेहतर काम कर सके। एक एक्चुरी को अनुभव हो जाने के बाद विदेश जाने के अधिक अवसर मिलते हैं। वैसे विदेशों की अपेक्षा भारत में सेलरी अधिक मिल रही है।

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