DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हौसले हों बुलंद तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

हौसले हों बुलंद तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

इरादे नेक हों और हौसले बुलंद तो सफलता जरूर कदम चूमती है। हिम्मत से आगे बढ़ें तो सफलता की राह में गरीबी भी आड़े नहीं आती। इसे साबित किया है एक टैम्पो चालक के बेटे ने। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले अनुपम का सफर इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट तक पहुंच चुका है। अनुपम को 97.09 परसेंटाइल मार्क्स मिले हैं। अभी वह बिहार के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बना है।

मुजफ्फरपुर के मूल निवासी श्रीकृष्ण जायसवाल पटना में टैम्पो चलाते हैं। उनकी इच्छा थी कि बेटा पढ़ कर नाम करे, लेकिन आमदनी का जरिया नहीं था। रोजगार की खोज में 1984 में पटना आ गए। पटना सिटी इलाके में एक छोटा-सा कमरा किराया पर लिया। इंटर तक ही पढ़ाई करने के कारण उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिली तो टैम्पो चलाने लगे। अनुपम को किसी तरह आठवीं तक पढ़ाया। छोटा बेटा अभिषेक और बेटी अनामिका को भी पढ़ाने की चिंता थी। पढ़ाई का खर्च चलना मुश्किल हो गया। अनुपम ने हिम्मत नहीं हारी और छोटे बच्चों को ट्य़ूशन पढ़ाना शुरू किया। हर माह एक हजार रुपए से लेकर बारह सौ रुपए की आमदनी हो जाती थी।

समय गुजरता गया। पटना के गुरु गोविंद सिंह कॉलेज से इंटर तक की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। अनुपम की प्रतिभा को देख कर उसकी मौसी भी उसे आर्थिक मदद करती थी। इंटर के बाद अनुपम इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन में बैठा और इंडियन स्कूल ऑफ माइंस के लिए उसका चयन हो गया। अभी वह यहां से डुएल डिग्री के तहत माइनिंग इंजीनियरिंग कम एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। 2010 में भी अनुपम का चयन आईआईएम में हो गया था, लेकिन पढ़ाई पूरी न होने के कारण नामांकन के लिए न्यूनतम आवश्यक अहर्ता को पूरा नहीं कर पाया था। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और इस बार भी कैट की परीक्षा में बैठा और इस बार फिर उसका चयन आईआईएम के लिए हो गया है। उसका छोटा भाई अभिषेक कोचीन यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग का छात्र है। छोटी बहन अनामिका एआईईईई की तैयारी कर रही है।

अनुपम की मां सुधा देवी बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान जब भी एक साथ चार-पांच हजार रुपए की जरूरत पड़ती थी तो परिवार वाले भी कुछ मदद करते थे।

उसके पिता आज भी टैम्पो चलाते हैं। सुबह दस बजे घर से निकलते हैं और रात 12 बजे वापस लौटते हैं। बेटी को भी इंजीनियर बनाना है। 2003 में मुजफ्फरपुर का घर बेच कर पटना सिटी में अपना घर बना लिया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हौसले हों बुलंद तो कुछ भी नामुमकिन नहीं