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हड़ताली पायलटों से दिल्ली हाई कोर्ट खफा

हड़ताल खत्म नहीं करने की जिद पर अड़े एयर इंडिया के पायलटों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि अब उदारता बरतने की जरूरत नहीं है और अगर पायलटों ने अदालत का आदेश नहीं माना तो उनमें से कई लोगों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

अदालत की पहल के बावजूद हड़ताली पायलटों के नेता और एयर इंडिया प्रबंधन आपसी मतभेतों को सुलझाने में नाकाम रहे। इस पर न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायामूर्ति बीना बीरबल की खंडपीठ ने कहा कि आप दोनों अवसर गंवा चुके हैं। हम इस बात की गारंटी नहीं दे सकते कि हमारे फैसले में क्या होगा। जो उदारता हम बरत रहे हैं, हो सकता है कि कल न बरतें।

एयर इंडिया के प्रबंधन ललित भसीन ने अदालत को बताया कि प्रबंधन पालयटों की मांग पर विचार करने को तैयार है, लेकिन समझौते से पहले शर्त नहीं रखी जा सकती है। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने हड़ताली पायलटों से कहा कि वह काम पर लौटने के बारे में फैसला करें। अदालत की पहल के बावजूद दोनों पक्ष सहमति बनाने में नाकाम रहे।

इससे पहले, खंडपीठ ने पायलटों से कहा कि आप हड़ताल समाप्त करें, हम प्रबंधन पर आपकी मांगों पर विचार करने के लिए दबाव डालेंगे। पिछले मंगलवार से कामकाज ठप करने वाले पायलटों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह बात कही। पीठ ने पायलटों को काम पर लौटने को कहा।

कमर्शियल पायलटस एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एनके कौल और केटीएस तुलसी ने कहा कि प्रबंधन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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