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केन्द्रीय टीम ने देखा आमी का हाल

आमी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए ग्रामीणों और आमी बचाओ मंच का संघर्ष रंग लाया है। सोमवार को केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने आमी से प्रभावित जरलहीं, कूड़ाभरत और कटका में दौरा कर नदी और नलों से पानी के सैम्पल लिए। प्रदूषणकारी कारखानों के कारण आमी की तबाही देखकर कर स्तब्ध टीम के सदस्यों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि अब आमी का कोई सच छिपाया नहीं जाएगा। सैम्पलों की जाँच के बाद दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। कटका में पीसीबी अधिकारियों के साथ र्दुव्यवहार के मुख्य आरोपित और आमी बचाओ मंच के संयोजक विश्वविजय सिंह भी जरलहीं और कूड़ाभरत में निरीक्षण के दौरान टीम के साथ-साथ रहे। गोरखपुर पहुँचने पर टीम सबसे पहले कांग्रेस दफ्तर गई, जहाँ से कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजीव सिंह के साथ पाँच-छह गाड़ियों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का काफिला भी उसके साथ हो लिया था।

यह टीम लखनऊ स्थित केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफिस से आई है। इसमें सुपरिटेण्डेंट इंजीनियर गुरुनाम सिंह, असिस्टेंट इंजीनियर रूना ओराव और असिस्टेंट साइंटिस्ट मुकेश कुमार शामिल हैं। शाम साढ़े तीन बजे टीम जैसे ही जरलही गांव पहुँची गांववाले उन्हें घेर कर खड़े हो गए। आमी की जांच करने के लिए पहली बार केन्द्र सरकार ने कोई टीम भेजी है यह खबर वहां पहले ही पहुँच चुकी थी। गांववालों ने टीम के सदस्यों को खुलकर अपना दर्द सुनाया।
गांववालों ने सुनाया आमी का दर्द
 
ग्रामीण फौजदार यादव ने कहा कि 15-20 साल पहले आमी इतनी निर्मल थी कि इसका पानी पीने से पेट की गैस तक ठीक हो जाती थी लेकिन आज इसका पानी पीकर हर महीने पांच-छह पशु मर जाते हैं। गांव में पानी से होने वाली सभी बीमारियों के रोगी हो गए हैं।

विश्वविजय सिंह भी पहुँच गए
जरलहीं में लोग टीम से अपनी बात बता ही रहे थे कि वहां कटका कांड के मुख्य आरोपित और आमी बचाओ मंच के संयोजक विश्वविजय सिंह भी पहुँच गए। वहां ‘विश्वविजय तुम मत घबराना. हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे भी लगे। विश्वविजय सिंह ने ग्रामीणों की ओर से टीम से बात करते हुए आमी का दर्द विस्तार से बयान किया। उन्होंने टीम से गांव के हैण्डपम्पों के पानी का सैम्पल लेने का अनुरोध किया और एक नल से बाल्टी में पानी निकालकर उसका पीलापन दिखाया।
नदी और हैण्डपम्पों से की सैम्पलिंग
  
टीम ने जरलहीं में एक पोखरे और रामगति यादव के दरवाजे पर स्थित हैण्डपम्प से पानी की सैम्पलिंग की। इसके बाद टीम जरलहीं पुल के नीचे बह रही आमी का सैम्पल लेने पहुँची। जरलहीं के फौजदार यादव ने पानी में घुसकर टीम को हाथ सतह की काली मिट्टी निकालकर दिखाई। टीम के सदस्य जितनी देर सैम्पलिंग करते रहे, ग्रामीण उन्हें आमी का दर्द बताते रहे। जरलहीं से जाते-जाते फौजदार यादव ने टीम के मुखिया गुरुनाम सिंह से पूछ ही लिया कि  क्या अब उन्हें आमी के प्रदूषण से मुक्ति मिल पाएगी। टीम ने फौजदार यादव और गांववालों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे पूरी कोशिश करेंगे।
 
जरलहीं के बाद आमी बचाओ मंच और कांग्रेस नेताओं के साथ टीम कूड़ाभरत गांव पहुँची। वहां भी ग्रामीणों ने टीम के सामने आमी के प्रदूषण से हो रही बीमारियों और रोजमर्रा की दिक्कतों का दर्द बयान किया। यहां विश्वविजय सिंह ने टीम को पूरा गांव घुमाया और कई हैण्डपम्पों से सैम्पलिंग कराई।
कटका में स्तब्ध रह गई टीम
 
सोमवार के निरीक्षण में टीम का आखिरी पड़ाव कटका गांव था। वहां गांववालों द्वारा नदी पार कर गांव में जाने के लिए बनाए गए पटरे के पुल के नीचे से टीम ने आमी के पानी की सैम्पलिंग की।

टीम को यहां आमी सबसे अधिक प्रदूषित नज़र आई। हवा के झोंकों के साथ पानी से उठती फैक्ट्री के कचरे की बदबू ने टीम के सदस्यों का भी वहां खड़ा रहना मुश्किल कर दिया। पूरी तरह काले पड़ चुके, मच्छर और कीड़े-मकौड़ों से भरे नदी के पानी को देखकर टीम के एक सदस्य की टिप्पणी ‘ये तो नदी लगती ही नहीं’ के बाद गांववालों ने खुलकर अपना दर्द बयान करना शुरू कर दिया। 20 अपैल को अधिकारियों के साथ र्दुव्यवहार के आरोप में रविवार को गिरफ्तार ङींगुरी उर्फ रामप्रीत के बेटे विवेक ने नदी में घुसकर टीम को कारखानों का कचरा दिखाया।

पुलिस के आंतक की शिकायत  
इसके बाद टीम गांव में गई। वहां गांववालों ने टीम के सदस्यों और कांग्रेस नेताओं के सामने कटका कांड के दिन से गांव में फैले पुलिस के आंतक की शिकायतें कीं।
लोगों ने कहा कि हर रोज रात को पुलिस गांव में आती है और आरोपितों को खोजने के नाम पर घरों में घुसकर निदरेष लोगों को परेशान करती है।

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