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अरावली के नाम पर चमका रहे धंधा

खान माफिया ने बेशक अरावली का सीना छलनी कर दिया हो। मगर स्वच्छ पर्यावरण का हवाला देते हुए कारोबारियों ने अरावली के नाम पर अपना धंधा चमकाना शुरू कर दिया है। प्रकृ़ति सौंदर्य का जिक्र हो या फिर प्रदूषण रहित वातावरण का तो एनसीआर में अरावली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक कदम आगे बढ़ाते हुए कारोबारियों ने अब इसके नाम को भुनाते हुए मिनरल वाटर बेचना शुरू कर दिया। एयरपोर्ट, मॉल्स जैसी जगहों पर इसके नाम का सहारा लेते हुए चालीस रुपये प्रति लीटर की कीमत पर पानी बेचा जा रहा है।
दरअसल, करीब दस हजार हेक्टेयर में फैली अरावली ने आज भागमभाग जिंदगी में स्वच्छ पर्यावरण के लिहाज से लोगों के दिल में बेहतर मुकाम बना लिया है। पर्यावरणविद् भी इसको बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर रहे हैं। एनसीआर में गिरते भूजल को नियंत्रित करने के लिए भूजल बोर्ड भी इसको बेहतर विकल्प बता रहा है। ऐसे फैसलों के एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच अरावली का महत्व काफी बढ़ गया। प्राकृतिक सौंदर्य का हवाला देते हुए यहां स्थापित शिक्षण संस्थान, रिसर्च सेंटर आदि अरावली का नाम भुना रहे हैं। शिक्षण संस्थान का प्रबंधन स्वच्छ पर्यावरण के बीच बेहतर शिक्षा की बात कहने से नहीं चूक रहे। दूसरी तरफ अरावली की तलहेटी में लगे मिनरल वाटर के प्लांट अपनी बोतलों पर अरावली का स्वच्छ पानी का मार्का देकर मार्केट में पैठ बना रहे हैं। अरावली का नाम लेकर पानी की शुद्धता साबित करने पर आमदा हैं। एयरपोर्ट, मॉल्स जैसे स्थलों पर इसकी कीमत चालीस रुपये प्रति लीटर है।
अरावली को भुनाने का सफर यहीं नहीं थमता। प्राइवेट बिल्डर्स के साथ नगर निगम जैसी सरकारी महकमें भी इसका नाम अपने प्राजेक्ट के साथ जोड़ रहे हैं। अरावली के साथ लगते सूरजकुंड क्षेत्र में बन रही इमारतों के साथ अरावली का नाम जोड़ा जा रहा है। नगर निगम अरावली विहार के नाम से प्रोजेक्ट लाने की तैयारी कर रहा है।
गौरतलब है कि पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने अरावली में अवैध खनन से भूजल स्तर गिरने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की हुई है। जिसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सीमा से पांच किलोमीटर परिधि में आने वाली अरावली में खनन पर रोक लगाई हुई है। वर्ष 2002 में लगी इस रोक के बाद वाटर लेवल और फारेस्ट के लिहाज से काफी बेहतर परिणाम सामने आए हैं। सेंट्रल ग्राउंड वाटर की रिपोर्ट के मुताबिक खनन बंद होने से अरावली के साथ पानी का स्तर कई फुट उठा है। खनन के दौरान गायब हुई हरियाली अरावली में लौट आई है।
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रवि सिंघला, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम: नगर निगम की हद में आने वाली अरावली में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद कोई कमर्शियल गतिविधि नहीं हुई है। अनुमति लेकर इससे पहले जो यूनिट लग चुके थे, वो ही चल रहे हैं। रजिस्टर्ड करवाने के बाद ही कोई अपने प्रोजेक्ट का नाम रख सकता है।
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सदा शिवम, मुखिया भारत मानक ब्यूरा फरीदाबाद: अरावली या इसके साथ दूसरा नाम जोड़कर कई मिनरल वाटर यूनिट ने लाइसेंस लिया हुआ है। इनके अलावा जो अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं, उनको लेकर छापामारी की जाती है। पिछले दिनों कई यूनिट अवैध रूप से चलते हुए पकड़े गए। जिनको बंद कर दिया गया।

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