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लैब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्कूलों में बनेंगे कमरे

छात्रों को गर्मी व बरसात की समस्या से जल्द निजात मिल सकेगी। छात्रों की आवश्यकता को देखते हुए विभाग काफी संख्या में कमरों को निर्माण करा रहा है। लेकिन, शिक्षा विभाग कमरों के निर्माण से पहले निर्माण सामग्री का लैब में टेस्ट करने लगी है। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही कमरों का निर्माण किया जा रहा है।


सर्वशिक्षा अभियान की स्कूलों में इंफ्रास्टक्चर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती रही है। इसके तहत जिले के स्कूलों में आवश्यकता अनुसार कमरों को निर्माण किया जाता है। लेकिन, अभी तक निर्माणाधीन कमरों के निर्माण प्रक्रिया के जांच का जिम्मा एसएसए के इंजीनियरों तक ही सीमित था। इससे कई बार मानकों की अनदेखी का मामला प्रकाश में आता रहा है। इसे देखते शिक्षा विभाग ने कमरों के निर्माण की क्वालिटी की मांनिटरिंग का जिम्मा भारत सरकार की संस्था वाप्क ोस को सौद दिया है। अब स्कूलों में लगने वाले ईट, कंकरीट व स्टील, सीमेंट व यहां तक की पानी की जांच की लैब में कराई जा रही है ताकि निर्माण में कही से कोई कमी ना रहने पाए।
सर्वशिक्षा अधिकार के जिला परियोजना संयोजक डॉ. दिनेश कुमार शास्त्री ने बताया कि जिले में सैकड़ों की संख्या में कमरों का निर्माण किया जा रहा है। विभागीय इंजीनियरों की ओर से पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। लेकिन, इसके बावजूद थर्ड पार्टी को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही हर स्कूल में बन रहे कमरों को स्टेटस रिपोर्ट में निर्माणीधीन भवन की फ ोटो जरुरी है। इसके बाद ही दूसरा बजट दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी हेड टीचर व अन्य को हिदायत दी गई है कि निर्धारित समय पर कार्य को पूरा कराए। गौरतलब है कि पहले कमरे के निर्माण के बाद कमरे की छत से पानी टपकने व समय से पहले टूटने की शिकायत आम बात हो गई थी। इससे छात्रों को बाहर बैठकर पढ़ने को विवश होना पड़ता था।
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वॉप्कोस के जोनल स्ीनियर कंसलटेंट जे.पी.सिंघल ने कहा एसएसए के तहत बनाए जा रहे कमरों के निर्माण में पूरी गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। निर्माण में ईट,स्टील, पानी व अन्य सामानों को प्राइवेट लैब में चेक कराई जाती है। इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाती है। उन्होंने बताया कि वॉप्क ोस सिविल वर्क की जांच की जिम्मेदारी गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात, पलवल, रेवाड़ी व नारनौल की मिली हुई है। अब अंबाला व हिसार डिवीजन भी मिल गई है।

निर्माणकार्य-

स्कूलों में कमरों में बन रहे हैं-250
आरटीई के तहत कमरों की संख्या-90
किचन शेड- 307
टायलेट- 37

स्कूलों की संख्या-

जिल में प्राथमिक स्कूल- 387
मिडिल - 78

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