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आखिर गलत साबित हुई ओसामा की सोच

ओसामा बिन लादेन ने 1990 में जब अमेरिका के खिलाफ जंग छेड़ी, तो उसका कहना था कि आतंकवादी अगर अमेरिका पर जोरदार प्रहार करेंगे, तो अमेरिका झुक जाएगा। लगातार पीछा करने के बाद इतवार को जिस तरह से लादेन को मार गिराया गया, उसने एक बात तो बता ही दी कि अमेरिका की कमजोरी के बारे में लादेन की कल्पना गलत थी।

ग्यारह सितंबर, 2001 की घटना के बाद अमेरिका को इस्लामी विश्व में जिस तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ा, उसके लिए काफी कुछ कहा गया है। यह भी कि अमेरिका ने इसका गलत ढंग से जवाब दिया और यह भी कि उसने अल-कायदा के हमलों की प्रतिक्रिया में हद ही कर दी। लादेन का यह विश्लेषण कि अमेरिका मैदान छोड़कर भाग जाएगा, यह उसने काफी हद तक बेरुत की लड़ाई, 1983 की बमबारी, और 1994 में सोमालिया में अमेरिकी फौज पर हमले की घटनाओं की उसकी सोच पर आधारित था। जिसे बड़ी आसानी से गलत ठहराया जा सकता है। इराक में बहुत बड़ी गलती के बावजूद जॉर्ज डब्ल्यू बुश का यही कहना था कि अमेरिका लगातार लड़ता रहेगा।

कल आधी रात को लादेन की मृत्यु की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ओबामा ने भी यही कहा, ‘हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कभी चैन से नहीं बैठेंगे।’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘न्याय हो गया।’ ये बयान बदले की भावना से बनी पश्चिम की किसी सामान्य फिल्म के डायलॉग जैसे ही लगते हैं। ओबामा ने इतवार की रात को उस अभियान से भी पर्दा उठाया, जिसके कारण अल-कायदा के इस सरगना को मारा जा सका। उन्होंने बताया कि आठ महीने पहले कुछ सुराग उनकी जानकारी में लाए गए थे। 

पाकिस्तान ने हेलीकॉप्टर से हुई इस सैनिक कार्रवाई को रोका नहीं या रोक नहीं सका, यह तथ्य भी बहुत कुछ कहता है। आने वाले दिनों में हमें पूरी तरह देखना-समझना होगा कि क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी में किसी को बिन लादेन के इस ठिकाने का पता था। खासकर इसलिए भी कि यह ठिकाना पाकिस्तानी फौज के एक परिसर के बहुत नजदीक है। भविष्य के लिहाज से देखें, तो यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों में अमेरिकी ऑपरेशन पर इसका व्यापक असर पड़ेगा।

अपने सरगना की मौत के बहुत पहले ही अल-कायदा ने अपनी साख और गति खो दी थी। यह बुरी तरह झुलस चुका था। इसने हर जगह, जहां उसका कुछ आधार बना, उसने अपने दुशमन बना लिए थे। इराक में, अफगानिस्तान में और यहां तक कि पाकिस्तान के कबायली इलाकों में भी। इस्लामिक विश्व इससे दूर होने लग गया था। इसके आतंकवादी तौर-तरीकों ने दुनिया भर में जितने अमेरिकियों को मारा, उससे ज्यादा मुसलमानों को मार दिया था।

 

 

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