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राजरंग

माला की भूख..समता मूलक समाज की पक्षधर पार्टी के सुप्रीमो एक पुस्तक का लोकार्पण करने दिल्ली से रांची पहुंचे। विधायक हॉल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। आयोजक की ओर से अतिथियों को सम्मानित करने के लिए माला की व्यवस्था की गयी थी। जब अतिथियों को सम्मानित करने की बारी आयी, तो उद्घोषक ने एक-एक कर अतिथियों का नाम लेना शुरू किया। सबसे पहले सुप्रीमो को सम्मानित करने की घोषणा की गयी। इसके बाद दूसर अतिथि का नाम पुकारा गया। इससे पहले सुप्रीमो साहब फिर उठ गये। सम्मानित करने पहुंची महिला ने उन्हें माला पहना दी। मंच पर सात अतिथि बैठे थे। पता नहीं दिल्ली से पहुंचे नेताजी कितने दिनों के भुखाये थे। एक-एक कर सभी अतिथियों की माला ग्रहण कर ली। उन्होंने अन्य अतिथियों को इसका सुख लेने का मौका ही नहीं दिया। जब बोलने की बारी आयी, तो पूरा शरीर हिला-हिला कर इतना बोले, इतना बोले कि श्रोता दस बच गये, बाकी भाग गये। भला हो ऐसे नेताजी का।

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