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अन्ना बनाम भ्रष्ट नेताजी

समाजसेवी अन्ना हजारे की जन लोकपाल बिल लाने की मुहिम में पूरे हिन्दुस्तान के जुड़ जाने से यह सिद्ध हो गया है कि आज पूरा देश भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों से मुक्ति चाहता है, जबकि भ्रष्ट नेताओं ने जन लोकपाल कानून के भविष्य में उनके ऊपर दिखने वाले असर के दूरगामी परिणाम को सोचते हुए अन्ना हजारे एवं सिविल सोसायटी का प्रतिनिधित्व करने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों पर तरह-तरह के भ्रामक दुष्प्रचार लगाने शुरू कर दिए हैं, ताकि उक्त कानून को मूर्त रूप न दिया जा सके। कांग्रेस के कई नेता अन्ना हजारे द्वारा किए गए अनशन पर हुए कुल खर्च का ब्योरा मांग रहे हैं। ये नेता उस व्यक्ति पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं, जिसने अपनी पेंशन, जमीन आदि समाज को दे दी है। कांग्रेस के यह दिग्गज नेता यदि कॉमनवेल्थ गेम्स, काले धन, 2जी स्पेक्ट्रम आदि अन्य घोटालों की जांच की मांग करते तो ये नेता भी आज समाज में आदर्श स्थापित करते। लेकिन ये घोटालों में जांच की मांग कैसे करते, जबकि ये घोटाले तो इन्होंने ही किए हैं। यह नेता अब सोचने लगे हैं कि हम तो भ्रष्ट हैं ही, ऐसा करते हैं कि जो सही ईमानदार व्यक्ति है उन पर कीचड़ उछालते चलें। सभी को मालूम है कि कमल का फूल कीचड़ में है तो कमल कमल ही है और कीचड़, कीचड़ ही रहेगा।
प्रशान्त बडोला, यमकेश्वर

जहरखुरानों का आतंक
जहरखुरानी गिरोह का आतंक दिनोंदिन बढ़ता रहा है। मगर न तो पुलिस और न ही परिवहन विभाग इसके लिए कोई ठोस कदम उठा रहे हैं। जहरखुरानी गिरोह का अब तक न तो कोई शख्स पकड़ में आया है और न ही इस गिरोह का कोई सुराग मिल पाया है। अगर यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो एक दिन इस गिरोह की हिम्मत इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि ये खुलआम लूटपाट पर उतारू हो जायेंगे, इसलिए पुलिस के साथ-साथ परिवहन विभाग को इस मामले में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। आम जनता को इस गिरोह के कार्यो से सचेत करना पड़ेगा।
शमशाद अली, देहरादून

आखिर कब तक
आखिर कब तक इस राज्य के बेरोजगार सड़कों पर भटकते रहेंगे? और जब वे रोजगार की मांग के बहाने एकत्रित होते हैं तो उन्हें मारपीट कर जेल में बंद कर दिया जाता है। अब तो नौबत यह है कि वो सड़कों पर अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें आन्दोलन करने के लिए कभी पानी की टंकी, तो कभी टेलीफोन टॉवर का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन माननीय मुख्यमंत्री के साथ-साथ उनका पूरा मंत्रिमंडल सत्ता के नशे में इतना चूर है कि वह यह भूल रहा है कि अगर वह जनता की बदौलत सत्ता पर आसीन न होते तो शायद उनके बच्चों भी आज यही कर रहे होते।
महिपाल, बड़कोट, उत्तरकाशी

बी.एड., बी.पी.एड. को रोजगार
वर्षों से नौकरी की आस लगाए बैठे बी.एड., बी.पी.एड. प्रशिक्षित बेरोजगार नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, जबकि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटर कॉलेजों तक अध्यापकों के हजारों पद खाली पड़े हैं तथा अधिकांश प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षा मित्र के भरोसे चल रहे हैं। आज अधिकांश लोग अपने बच्चों को प्राइवेट एवं निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, केवल गरीब लोगों के बच्चों ही सरकारी स्कूलों में हैं। इन स्कूलों पर न तो सरकार का ध्यान है और न ही किसी अन्य लोगों का। जब तक सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में पांच शिक्षक एवं एक कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की, तब तक प्राथमिक शिक्षा में सुधार नहीं हो सकता। इसलिए बेरोजगारी से परेशान बी.एड., बी.पी.एड. प्रशिक्षितों को अति शीघ्र नियुक्ति प्रदान करें।
आचार्य जगदीश शाह, टि. गढ़वाल्

 

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