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'वोट के बदले नोट' पर अदालत ने मांगी स्थिति रिपोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली पुलिस से 'वोट के बदले नोट' मामले में जांच को लेकर स्थिति रिपोर्ट मांगी।

अदालत ने पुलिस से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि 2008 में संसद में विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में मतदान के लिए सांसदों को दी गई कथित रिश्वत की जांच की दिशा में उसने अब तक क्या किया है।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर. एम. लोठा ने दिल्ली पुलिस के आयुक्त बी. के. गुप्ता से जांच की स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा। आरोप है कि भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते के मुद्दे को लेकर पैदा हुई राजनीतिक स्थिति के बाद  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के पक्ष में मतदान के लिए सांसदों को रिश्वत दी गई।

अदालत ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है। अदालत का यह निर्देश पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त जे. एम. लिंगदोह द्वारा अदालत को यह बताने के बाद सामने आया है कि दिल्ली  पुलिस की अपराध शाखा द्वारा इस कथित रिश्वत कांड की कोई जांच नहीं की गई।

दिल्ली पुलिस को इस मामले की जांच तब सौंपी गई थी जब संसद की एक समिति ने रिश्वत के आरोपों के संदर्भ में आश्वस्त करने वाले सबूत न होने की बात कही थी।

लिंगदोह की ओर से अपील करने वाले वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अदालत को बताया कि हालांकि तीन साल गुजर गए, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई।

 

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