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संगीत के सुरों से सुधरेगी सेहत

संगीत के सुरों से सुधरेगी सेहत

संगीत न केवल तनाव दूर करता है, बल्कि आत्मशांति भी प्रदान करता है। शोधों का कहना है कि यह प्रेरणा और सकारात्मक सोच को बढ़ाता है। इसका इस्तेमाल कई रोगों में किया जा रहा है। मृदुला भारद्वाज का आलेख

आपने अक्सर मेट्रो, बस या राह में चलते देखा होगा कि आजकल लोग मोबाइल, आईपॉड आदि के जरिए गाने सुनने में व्यस्त रहते हैं। संगीत सुनने वाले इस वर्ग में वैसे तो हर वर्ग और हर उम्र के लोग शामिल होते हैं, लेकिन अधिक संख्या युवाओं की है। भागदौड़ भरी जिंदगी वाले, खासकर वर्किंग क्लास लोगों में काम की व्यस्तता के बढ़ने से कई तरह की बीमारियां भी जन्म ले रही हैं। इसके चलते इन लोगों में अवसाद, सिरदर्द जैसी बीमारियां आम बात हो गई है। लम्बे समय तक एलोपेथी दवाइयां लेना भी इन हालातों में कारगर साबित नहीं होता है। यही वजह है कि अब अवसाद और तनाव से बचने के लिए लोगों ने संगीत का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

कहा जाता है कि अकबर के दरबार में जब तानसेन गाते थे, तो दीपक खुद-ब-खुद जल उठते थे। संगीत की इसी शक्ति को अब विज्ञान ने भी माना है। आज जहां एक्यूपंचर थेरेपी, हर्बल थेरेपी, आयुर्वेद थेरेपी, ऑयल मसाज थेरेपी, मड थेरेपी, मेग्नेटिक थेरेपी जैसी चिकित्सा हैं, वहीं म्यूजिक थेरेपी में भी रोगों से लड़ने की क्षमता है।

मानवता का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना संगीत भी है। नदी की लहरों की आवाज और पक्षियों की चहचहाहट कुदरती है। जब संगीत का इस्तेमाल तनाव और अवसाद कम करने में हुआ तो इसे म्यूजिक थेरेपी कहा गया। म्यूजिक थेरेपी से तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। याददाश्त कम होने पर इसकी मदद ली जा सकती है। थेरेपी लेने वाले लोगों ने माना है कि म्यूजिक थेरेपी के प्रयोग से उनके रिश्तों में भी सुधार आया है।

संगीत ग्रंथियों में उत्तेजना पैदा करता है, जो नर्वस सिस्टम और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। अच्छा और उपयुक्त संगीत व्यक्ति को रिलेक्स करता है और तरोताजा रखता है। संगीत सुनने से चिंता, गुस्सा जैसे नकारात्मक पहलू भी दूर रहते हैं। संगीत सिरदर्द, पेट संबंधी विकार और चिंता को भी दूर करता है। म्यूजिक थेरेपी से भावनाओं, ब्लड प्रेशर पर काबू रखने और लीवर के कार्यो को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद मिलती है।

सर्वेक्षण कहते हैं कि संगीत मरीज में मोटिवेशन और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाता है। अगर म्यूजिक थेरेपी का प्रयोग पारंपरिक उपचार के साथ किया जाए तो अधिक फायदेमंद होता है, इसलिए स्ट्रोक पेशेंट्स के लिए म्यूजिक थेरेपी अच्छी रहती है और मरीज को जल्दी रिकवर करने में सहायता करती है।

अल्झाइमर, परकिंसन, अन्य मूवमेंट डिसऑर्डर, ट्रॉमेटिक, स्ट्रोक, एक्यूट एंड क्रोनिक पेन, डिप्रेशन जैसी बीमारियों में म्यूजिक थेरेपी बहुत मददगार साबित होती है। हर व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार विभिन्न प्रकार की म्यूजिक थेरेपी होती है। म्यूजिक थेरेपी निश्चित नहीं है। सभी इंसान अलग हैं और सभी की अपनी खास पसंद और आवश्यकताएं होती हैं, इसलिए हर व्यक्ति अलग तरह के संगीत को समझता है।

मन को रिलैक्स करता है संगीत
शिबानी कश्यप, गायिका

आदिकाल से संगीत भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। वेदों में भी संगीत का विशेष महत्त्व है। ‘सामवेद’ तो पूर्ण रूप से संगीत से भरपूर है। वात, पित्त और कफ जैसे दोषों को म्यूजिक थेरेपी के जरिए काबू किया जा सकता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान संगीतकार भी कई वर्षों से म्यूजिक थेरेपी का प्रयोग करते आ रहे हैं। शास्त्रीय संगीत के उस्ताद त्यागराज ने अपने संगीत से एक मृत व्यक्ति को दुबारा जिंदगी बख्शी थी।

मैं खुद एक गायिका हूं। दिन-रात संगीत से ही जुड़ी रहती हूं। लेकिन बहुत लम्बे और थका देने वाले शेड्यूल के बाद मैं भी तनाव और काम के बोझ से निजात पाने के लिए संगीत का सहारा लेती हूं। संगीत में एक सुकून होता है। संगीत न सिर्फ मानसिक शांति देता है, बल्कि स्ट्रेस को कम करने में भी मदद करता है। वैसे तो मैं खुद ही संगीत के काफी करीब हूं, फिर भी मन को हल्का करने और रिलैक्स करने के लिए जैज, सूफी और सॉलफुल म्यूजिक सुनना पसंद करती हूं। 

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