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सत्कर्म ही मेरा अध्यात्म

सत्कर्म ही मेरा अध्यात्म

सरोद के प्रख्यात कलाकार उस्ताद अमजद अली खान के पुत्र व युवा कलाकार अमान अली खान सभी धर्मों के प्रति एक नजरिया, हर किसी के लिए एक दृष्टिकोण और माता-पिता की सेवा को अपना अध्यात्म मानते हैं। वह कहते हैं-

माता-पिता की सेवा, घर की जिम्मेदारियों का निर्वाह, बड़ों की इज्जत, छोटों का लिहाज और अमीर से अमीर व गरीब से गरीब के साथ एक जैसा व्यवहार करना ही मेरा अध्यात्म है। मुझे लगता है कि दूसरों की खुशी से खुश होना और दूसरों के दुख से दुखी होना बहुत जरूरी है। जब मैं किसी को दूसरे की खुशी से चिढ़ते देखता हूं तो बड़ी तकलीफ होती है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जो लोग दूसरे की खुशी से चिढ़ते हैं, ऊपर वाला उनसे चिढ़ता है। मुझे यह देखकर बड़ी खुशी होती है कि सामने वाला व्यक्ति खुश है। ऊपर वाले की उन पर कृपा है, जो बहुत बड़ी बात है।

मैं जब किसी को सड़क पर अच्छी गाड़ी में जाते देखता हूं तो बड़ा आनन्द आता है। किसी दीन-हीन को देखता हूं तो मन दुखी हो जाता है। अपनी तरफ से जो कर सकता हूं, करने की कोशिश करता हूं। अपने माता-पिता से मैंने यही सीखा है। मेरे माता-पिता मेरे लिए शिव-पार्वती हैं, जहां से ये बातें मुझे सीखने को मिलीं। मेरे घर में ऐसा ही माहौल है। पिताजी मुसलमान हैं, माताजी हिन्दू हैं। मैं अल्लाह, भगवान, साईं बाबा सबको मानता हूं, मेरे लिए सब एक हैं। ये कभी भी भेदभाव करना नहीं सिखाते। इसके बाद पूजा-पाठ वाली व्यवस्था का मेरे लिए कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

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