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बचें इन बीमारियों से

बचें इन बीमारियों से

पच्चीस-तीस की उम्र में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थकान, मोटापा और बैक पेन जैसी तकलीफें आम होती जा रही हैं। क्यों हो रही हैं ये बीमारियां और क्या है इनका निदान, बता रहे हैं मैक्स हॉस्पिटल से जुड़े फिजिशियन डॉ. राजीव गुप्ता।

हाइपरटेंशन: हाई ब्लडप्रेशर यानी उच्च रक्तचाप हमारी अनियमित जीवनशैली की ही देन है। आधुनिक सुख-सुविधाओं या बेहतर जीवन की दौड़ व खुशियों की तलाश में इस बीमारी से कम उम्र में ही लोग ग्रसित हो रहे हैं। लगातार बढ़े हुए ब्लडप्रेशर का असर गुर्दे, ब्लडशुगर, कोलेस्ट्रॉल, आंखों आदि पर भी पड़ता है। मोटे रूप से कहा जाये तो टारगेट ओरिएंटेड जॉब की वजह से यह बीमारी युवाओं में जल्दी हो रही है।

स्ट्रेस: एक दूसरे से आगे निकलने की होड़, खुद को बेहतर साबित करने की दौड़, पैसा कमाने की चाहत के चलते स्ट्रेस यानी तनाव जैसी बीमारी हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। इन कारणों की वजह से स्ट्रेस लेवल का बढ़ना तो निश्चित है और हमारे हार्मोन्स पर भी इसका असर पड़ता है।

मोटापा: मोटापा न सिर्फ अपने आप में एक बड़ी समस्या है, बल्कि कई बीमारियों, जैसे हाई ब्लडप्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम आदि की वजह से भी बढ़ जाता है। विश्वभर में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग सामान्य से अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। यदि बॉडी मास इंडेक्स 18 से 25 के बीच है तो इस मात्र को स्वस्थ माना जाता है, लेकिन 25 से ऊपर बीएमआई को सामान्य से अधिक व 30 से अधिक को मोटापे की निशानी माना जाता है। पुरुषों में 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं में 35 इंच से ज्यादा मोटी कमर बीमारी का सबब है।

बैक पेन: इन दिनों बैकपेन की समस्या भी आम है। कारण है घंटों कंप्यूटर के आगे बैठे रहना, गाड़ी या अन्य वाहन में अधिक दूरी तक और अधिक समय तक सफर करना, झुक कर सामान उठाना, गलत पॉश्चर में बैठना व लेटना आदि। बैक पेन में मांसपेशियों का लचीलापन कम होने लगता है और वे कमजोर हो जाती हैं।
 
डायबिटीज: आमतौर पर यह आनुवांशिक बीमारी है। पहले यह बढ़ती उम्र में होती थी, पर अब यह छोटी उम्र में ही हो रही है। वजह है अनियंत्रित खानपान और खराब जीवनशैली। डायबिटीज कंट्रोल में नहीं रहे तो शरीर के अंग कमजोर पड़ जाते हैं और इसका सर्वाधिक असर हृदय पर पड़ता है।

आर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस: शारीरिक मेहनत या एक्सरसाइज के अभाव में कम उम्र से ही ये बीमारियां होने लगी हैं। वजन अनियंत्रित होने पर तीस-पैंतीस की उम्र में घुटनों व छोटे-छोटे जोड़ो में दर्द होने लगता है। इसी तरह ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में खोखलापन आ जाने की समस्या महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद देखी जाती थी, पर अब कम उम्र में भी यह तेजी से होने लगी है।

हार्ट प्रॉब्लम: बदले लाइफ स्टाइल और बढ़ते दबाबों के कारण आजकल युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अब यह बीमारी पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी बराबर की संख्या में हो रही है।
 
सावधानियां

खानपान में बदलाव लायें। अधिक कोलेस्ट्रॉल और वसायुक्त पदार्थ, अंडे, घी, तेज मिर्च व तले-भुने पदार्थ और मिठाई आदि का प्रयोग कम कर दें। संतुलित भोजन लें, ताकि कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलन में रहे।

नमक कम खाना और खिलाना अपनी आदत में डालें, ताकि आगे चलकर आपको या आपके बच्चों को परेशानी न हो। चीनी का भी प्रयोग कम ही करें।

सिगरेट-शराब से तौबा करें।

तनाव से राहत के लिए प्रतिदिन एक्सरसाइज करें। योग, एरोबिक्स, तेज वॉक आदि जो भी सुविधाजनक लगे, वह व्यायाम करें। भरपूर नींद लें, क्योंकि इससे शरीर स्वस्थ रहता है और मन-मस्तिष्क भी ऊर्जावान बने रहते हैं। आठ घंटे की नींद लें।

मेडीटेशन करें, क्योंकि मानसिक दबाव में इससे राहत मिलती है।

भोजन शांत व आराम से करें। भागमभाग में जल्दी-जल्दी न गटकें।

समय-समय पर अपना पूरा चैकअप करवाते रहें, ताकि रोग की संभावना होने पर समय रहते उसका इलाज कराया जा सके।

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