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एक बार फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान

एक बार फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान

दुनिया में आतंकवादी नफरत के सबसे बड़े स्कूल के प्रिंसिपल ओसामा बिन लादेन की मौत पाकिस्तान को एक बार फिर बेनकाब कर गई है। आखिरकार ओसामा पाकिस्तान के ही एक हिस्से में आराम की जिंदगी बसर करते दबोचा गया और इसके साथ ही पाक का एक दशक पुराना ये नापाक दावा बेबुनियाद साबित हो गया कि ओसामा पाकिस्तान में नहीं है। वर्षों से पाकिस्तानी सरकारों की और आईएसआई की यही घोषित पोजिशन थी कि ओसामा पाकिस्तान में नहीं है।

एबटाबाद की जिस हवेली में ओसामा अमेरिकी सेना की कार्रवाई का शिकार हुआ वह इस्लामाबाद से सिर्फ डेढ़ सौ किलोमीटर दूर थी। अच्छी खासी घनी आबादी वाला यह इलाका नागरिक सुख सुविधाओं का स्वर्ग है। जबकि आईएसआई बयान देती रही है कि वह अफगानिस्तान की सीमा पर किसी गुफा में छुपा हो सकता है।

तमाम विदेशी न्यूज चैनलों पर विशेषज्ञ बिरादरी यह संदेह जता रही है कि एबटाबाद में ओसामा के दबोचे जाने की घटना इशारा कर रही है कि ओसामा वहां पाकिस्तानी सरकार के संरक्षण में रह रहा होगा। बेवजह नहीं कि जिस हवेली में ओसामा पकड़ा गया उसके चारों तरफ 12 फीट तक ऊंची चारदीवारी थी जिस पर कांटेदार बाड़ भी लगी हुई थी।

गौरतलब है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के फौरन बाद बुश प्रशासन ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने आतंक के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ नहीं दिया तो उस पर इतने बम बरसाए जाएंगे कि वह पाषाण युग में पहुंच जाएगा। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपनी किताब में यह स्वीकार किया है कि बुश प्रशासन ने उनसे कह दिया था कि ‘वी विल बॉम्ब यू टू द स्टोन एज!’ इससे यही अर्थ निकलता है कि पाकिस्तानी सेना और वहां के शासनाध्यक्ष स्वेच्छा से नहीं, बल्कि दबाव के तहत अमेरिकी सेना की मदद करते रहे हैं।

ओसामा के पाकिस्तान में दबोचे जाने से इसी अर्थ की पुष्टि हुई है। इसका आशय यह भी लगाया जा सकता है कि एक तरफ पाक सरकार ओसामा को शरण दे रही थी, उसका इलाज करवा रही थी, लेकिन दूसरी तरफ व्हाइट हाउस के गुस्से से बचने के लिए अमेरिकी सेना के सहयोग की भ्रामक कवायद भी कर रही थी।

गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले अमेरिकी मीडिया ने समाचार दिया था कि मुंबई हमलों की जांच के तहत लश्कर के चार सदस्यों के नाम उजागर हुए हैं जो पाकिस्तान में रहते हैं। एक तथ्य यह भी उभरा था कि एक वक्त पर पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई को आतंकवादी संगठन घोषित करने पर भी विचार किया जाता रहा है।

ओसामा के मारे जाने के बाद आईएसआई के पूर्व चीफ हामिद गुल ने सीएनएन-आईबीएन पर एक बयान में कहा है कि वे खुद हैरान हैं कि ओसामा के ऐन पाकिस्तान के भीतर मारे जाने की खबर आई है। इस हैरानी के अपने कई अर्थ हैं।

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