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'सरकार को लोकपाल कानून का मकसद और मूल सिद्धांत सौंपे'

'सरकार को लोकपाल कानून का मकसद और मूल सिद्धांत सौंपे'

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावशाली लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के मकसद से गठित संयुक्त समिति की दूसरी बैठक सोमवार को नई दिल्ली में हुई।

लोकपाल मसौदा समिति की बैठक में समाज की ओर से शामिल सदस्यों ने सरकार को दो दस्तावेज सौंपे। पहला दस्तावेज प्रस्तावित लोकपाल कानून के मकसद और दूसरा प्रस्तावित कानून के मूल सिद्धांतों के बारे में है।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकपाल मसौदा समिति की अगली बैठक सात मई को होगी। बैठक की कार्यवाही सही दिशा में आगे बढ़ रही है और हमें उम्मीद है कि संसद के मानसून सत्र से पहले एक प्रभावशाली मसौदा तैयार कर लिया जाएगा।

लोकपाल मसौदा समिति में समाज की ओर से शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने केंद्र के मंत्रियों को संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक संधि के अनुमोदन की अनिवार्यताओं से भी अवगत कराया। प्रशांत भूषण ने कहा कि तय समयसीमा से पहले विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए अगर जरूरत पड़ी, तो बैठकें जल्दी-जल्दी कराई जाएंगी।

समिति में केंद्र के प्रतिनिधियों के तौर पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी (अध्यक्ष), विधि मंत्री वीरप्पा मोइली (संयोजक), गृह मंत्री पी. चिदंबरम, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद शामिल हैं।

समिति में समाज की ओर से पांच सदस्य गांधीवादी अन्ना हजारे, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े, वकील प्रशांत भूषण और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।

लोकपाल मसौदा समिति की पहली बैठक 16 अप्रैल को हुई थी। इसमें समाज की ओर से शामिल सदस्यों ने उनके द्वारा तैयार जन लोकपाल विधेयक मसौदे को आधार मसौदा मानने पर जोर दिया।

पहली बैठक से ठीक पहले एक सीडी के सामने आने पर विवाद पैदा हो गया था। इस सीडी में शांति भूषण की सपा प्रमुख मुलायम सिंह और सांसद अमर सिंह से कथित तौर पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग थी।

भूषण पर इलाहाबाद में एक मकान खरीदने पर कथित तौर पर कम स्टाम्प ड्यूटी देने और उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार द्वारा उन्हें कथित रूप से कम कीमत पर नोएडा में दो फार्महाउस आवंटित किए जाने को लेकर भी विवाद पैदा हुए।

विवादों के चलते कर्नाटक के लोकायुक्त न्यायमूर्ति हेगड़े ने समिति से हटने का मन बनाया लेकिन हजारे और बाकी सदस्यों ने उन्हें समिति में बने रहने के लिए राजी कर लिया।

पांच दिन अनशन कर अपने आंदोलन के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने वाले गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे की मांगों को मानते हुए सरकार ने संयुक्त समिति के गठन के लिए नौ अप्रैल को अधिसूचना जारी की थी।

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