DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विल पावर की मिसाल बन गईं सुधा चंद्रन

विल पावर की मिसाल बन गईं सुधा चंद्रन

सुधा चंद्रन यानी आज की जानी-मानी फिल्म व टीवी कलाकार। बस दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया और विल पावर की शानदार मिसाल बन गईं।

आज कोई उन्हें ‘कहीं किसी रोज’ की रमोला सिकंद के नाम से जानता है तो कोई ‘के स्ट्रीट पाली हिल’ की गायत्री कौल के रूप में। आपमें से बहुत सारे लोगों ने उन्हें सोनी टीवी के डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा’ में भी देखा होगा और फिल्म प्रेमियों ने तो दजर्नों फिल्मों में उनके अभियन से अभिभूत होकर तालियां बजाई होंगी। ‘नाचे मयूरी’ में तो वह नायिका थीं। नायिका भी ऐसी, जो अपने वास्तविक जीवन को परदे पर खुद ही जी रही थी।

यह फिल्म सुधा के जीवन पर आधारित थी। खास बात यह भी कि वह पहली कलाकार थीं, जिन्होंने अपने जीवन पर बनने वाली फिल्म में खुद ही अभिनय किया था। लगभग पांच वर्ष की उम्र से ही संगीत की तालीम शुरू कर देने वाली सुधा ने 17 साल की होते-होते 75 से अधिक स्टेज शो देकर भरतनाटय़म की उम्दा कलाकार के रूप में शोहरत हासिल कर ली थी। लेकिन 1981 में हुई एक बस दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी थी। इस दुर्घटना की वजह से डॉक्टर को उनका दायां पैर काटना पड़ा। अपने नृत्य से पूरे सभागार को झुमा देने वाली सुधा तकदीर की इस मार से बुरी तरह हिल गईं। लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया।

शायद यह ऐसी ईमानदार छटपटाहट थी, जिससे उम्मीद की रोशनी निकलकर सामने आई। सुधा की नजर एक पत्रिका में छपी उस स्टोरी पर पड़ी, जिसमें डॉ. सेठी के जयपुर पैर (कृत्रिम पैर) की विस्तृत चर्चा थी। डॉक्टर से बातचीत के बाद सुधा की आंखों में उम्मीद की रोशनी चमक उठी कि वे फिर से नृत्य कर पाएंगी। उनकी इस अद्भुत सफलता ने हर किसी को अचंभित कर दिया। पत्र-पत्रिकाओं में सुधा की कहानी छपने लगी। तभी जाने-माने फिल्म निर्माता रामोजी राव की नजर उनकी कहानी पर पड़ी और उन्होंने 1984 में तेलुगू में मयूरी नाम की फिल्म बना डाली। इसकी सफलता से अभिभूत होकर दो साल बाद ही रामोजी राव ने टी. रामाराव के निर्देशन में नाचे मयूरी हिन्दी में बनाई और पूरी दुनिया को मालूम हो गया कि सुधा ने तमाम मुश्किलों को पीछे धकेल दिया। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:विल पावर की मिसाल बन गईं सुधा चंद्रन