DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

इजरायल भी, फलस्तीन भी

इजरायली सेना की एक टुकड़ी किसी नाके पर फलस्तीनियों की गाड़ियों की तलाशी ले रही थी। यह कोई नई बात नहीं थी। जबसे इजरायल बना है, तब से आज तक फलस्तीनियों की गाड़ियों, घरों, दुकानों की छानबीन होती आई है। लेकिन बरसों पहले उस नाके पर ली जा रही तलाशी के दौरान कुछ ऐसा होना था, जिसे फलस्तीनी जन-मानस में लोक-गाथा बनकर दर्ज होना था।

एक नौजवान सैनिक को उसके अफसर ने आदेश दिया कि वह एक बुजुर्ग फलस्तीनी को कार से घसीटकर बाहर निकाले, जो बार-बार कहने के बावजूद बाहर नहीं आ रहा था। उस सैनिक ने अफसर का आदेश मानने से इनकार ही नहीं किया, बल्कि उससे हाथापाई तक कर डाली। सैनिक को इस हरकत के लिए जेल में डाल दिया गया और उसे फौज से निकाल दिया गया। उस नौजवान सैनिक का नाम जुलिआनो मेर खमीस था।

1978 की वह घटना फलस्तीन के जेनिन शहर में घटी थी। तैंतीस साल बाद उसी जेनिन शहर में पिछले चार अप्रैल को जुलिआनो की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जुलिआनो की कहानी महज एक आदमी की कहानी भर नहीं है, वह इजरायल-फलस्तीन की त्रासदी की दास्तान भी है। 

आज जुलिआनो उसी कब्रगाह में दफन हैं, जहां उनकी मां की कब्र है। मां-बेटे के लिए आंसू दोनों तरफ बहे। विडंबना देखिए, जब आर्ना मेर खमीस की मौत हुई, तो यहूदी रब्बाइयों ने उनके लिए कब्र की जमीन देने से मना कर दिया था, क्योंकि वह फलस्तीनी आजादी की तरफदार थीं। उनका बेटा एक फलस्तीनी हत्यारे का निशाना इसलिए बना कि वह एक यहूदी मां की संतान था।         

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:इजरायल भी, फलस्तीन भी