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वे भी भ्रष्टाचारी हैं

हम सभी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का भरपूर समर्थन करते हैं, किंतु क्या सिर्फ राजनेता और सरकारी कर्मचारी ही भ्रष्टाचार करते हैं? एनजीओ के नाम पर सरकारी धन हड़पने वाले, पैसे लेकर नंबर बढ़ाने वाले, मिलावट करने वाले, लाइन तोड़ वीआईपी बनकर भगवान के दर्शन करने वाले, अपनी मांगें मनवाने के लिए यातायात अवरुद्ध करने वाले, कन्या भ्रूण हत्या करने वाले, दहेज लेने-देने वाले क्या भ्रष्टाचारी नहीं हैं? जब तक हम सभी स्वयं में, अपने परिवार में, रिश्तेदारों में, परिवेश में जड़ें जमाए बैठे भ्रष्टाचार को दूर करने का संकल्प नहीं लेंगे, तब तक सिर्फ भाषणबाजी करने, अनशन करने से और मात्र सरकारी प्रयासों से भ्रष्टाचार का रोग दूर नहीं हो सकेगा।
श्रीमती पुष्पा पाल, 684, इन्द्रा पार्क, नई दिल्ली

महिलाएं ही काफी हैं
इस समय हमारे देश में करीब सवा अरब लोग निवास करते हैं। इनमें से पांच करोड़ को आप अलग कर दें। इन अलग किए गए लोगों में कुछ बड़े पूंजीपति हैं, कुछ छोटे पूंजीपति, कुछ बड़े-छोटे नेता हैं, तो कुछ बड़े-छोटे नौकरशाह। बाकी एक अरब बीस करोड़ की आबादी में लगभग साठ करोड़ महिलाएं हैं, जो तन, मन, धन से अन्ना हजारे के ‘भ्रष्टाचार विरोधी’ आंदोलन के साथ हैं। केवल यही संख्या काफी है पांच करोड़ भ्रष्टों को धूल चटाने के लिए। अन्ना जी! आप पूरे जोर-शोर से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाइए। इस देश की सिर्फ महिलाएं और छात्र वर्ग ही काफी हैं आपके साथ भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूत करने के लिए।
शांति सक्सेना, अमर कॉलोनी, लाजपतनगर, नई दिल्ली

पहाड़ के नीचे ऊंट
राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटालों ने आखिर सुरेश कलमाडी को देर से ही सही, जेल के अंदर भेज ही दिया। सीबीआई ने चौथी बार सुरेश कलमाडी से पूछताछ के बाद ही उन्हें गिरफ्तार किया। अब तक वह अपने आप को निदरेष बताते चले आ रहे थे, पर अब साफ है कि सीबीआई ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर कलमाडी को गिरफ्तार किया है। कलमाडी तो इन घोटालों की छोटी-सी मछली हैं, अभी कई बड़े मगरमच्छों की गिरफ्तारी का देश के लोगों को इंतजार है। राष्ट्रमंडल खेलों में हुए अरबों रुपयों के खेल में घोटालों की सच्चाई और घोटालेबाजों के असली चेहरे देश की जनता के सामने सीबीआई को लाना ही होगा। तभी न्याय हो सकेगा।
श्वेता निगम, एच-19, गढ़वाली मोहल्ला, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

प्रतिभा का यह हश्र
राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा को बरेली स्टेशन के पास लुटेरों द्वारा ट्रेन से फेंके जाने की घटना पर संदेह जताया जा रहा है। रेलवे पुलिस का कहना है कि या तो उसके साथ दुर्घटना घटी है या उसने आत्महत्या की कोशिश की थी। लेकिन अरुणिमा व उनके घरवाले रेलवे पुलिस के इस दावे को खारिज कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि अरुणिमा ने अपने साथ लूट की कोशिश की बात कही थी, जबकि किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। अब इसकी भी चर्चा है कि इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया जाए। जांच कोई भी करे, सीबीआई या रेलवे पुलिस, जांच में क्या खुलासा होता है, यह तो बाद की बात है। अभी सबसे दुख की बात यह है कि देश ने एक प्रतिभावान खिलाड़ी खो दिया है। इससे पूरे देश को क्षति पहुंची है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें इस घटना से सबक लेकर यह सोचने पर ज्यादा बल देना चाहिए कि इस तरह की घटना का शिकार कोई और अरुणिमा न होने पाए।
खादिम अब्बास रिजवी, पूर्वाचल विश्वविद्यालय, जौनपुर

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