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अब माउस नहीं नाउस

कंप्यूटर को अपनी पूंछ के दम पर चलाता माउस अब गुजरे कल की बात होगी। अमेरिका के ओटावा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंफार्मेंशन टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर संचालन में क्रांतिकारी परिवर्तन कर डाला है। अब की-बोर्ड और स्क्रीन को इतना संवेदी बनाया गया है कि वह मात्र नाक की सीध पर चल पड़ते हैं। चूंकि माउस हटा कर सारा काम नाक के सहारे हो जाता है, इसलिए इसे नाउस नाम दिया गया है।

हैंडफ्री कंप्यूटर संचालन विशेष तौर पर विकलांगों के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस अनोखी पद्धति के निर्माता दिमित्री गोरोडिंची के अनुसार यह तकनीक वेब कैमरे और कंप्यूटर को पहुंचाता है और फिर चेहरे और कंप्यूटर प्रणाली के बीच एक तारतम्य बन जाता है। इस तरह से चेहरे के बाहर निकली नाक नाउस बन जाती है।

जैसे-जैसे आवश्यकतानुसार चेहरा गति करता है, जरूरत का बटन नाक की सीध में आता है। दाएं-बाएं आंख की पलक उठती-गिरती है और कंप्यूटर खुलता जाता है। पलक झपकाते खुली स्क्रीन पर मनचाहे भाव लिख जाते हैं और प्रिंटर से संबंध होने पर प्रिंट आ जाता है। यह कमाल है नाक और झपकती आंखों का, जो आधुनिकतम कंप्यूटर तकनीक से जा मिला है।
कुलदीप शर्मा

दिल के लिए कविता पाठ
नाजुक दिल पर काबू पाने के लिए मुक्त कंठ से कविता-पाठ कीजिए। स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बेरने के डॉ़  डायटिच वान वोनिन और जर्मन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटेन के डॉ़  हेनरिक वैटरमैन ने एक ही दिशा में रोचक और महत्त्वपूर्ण शोध कर दिल के रोगियों को राहत दी है। शोध बताता है कि आज की तेज जिंदगी में जब हर कोई तनाव में है तो चोट दिल पर पड़ना जाहिर-सी बात है। किसी भी भाषा में किया गया कविता-पाठ आपको भावों की गहराई में डुबो देता है। मन कहीं केंद्रित हो जाता है और गम भूल जाता है, तनाव घटने लगता है और आनंददायी अनुभूति मिलती है।

इससे श्वास से संबंधित रोग भी काबू में आने लगते हैं। हृदय से संबंधित रोगों को भी मात्र कविता-पाठ से काबू किया जा सकता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने तो कई वर्ग बना कर लोगों को कविता सुनाई, मगर ताजा परीक्षण में सात हृदय रोगियों को चुना गया।

पहले चरण में 15 मिनट तक उनके हृदय की धड़कन और रक्तचाप मापा गया। दूसरे चरण में 30 मिनट तक कविता सुनाई गई, पूरी लय के साथ। रोचक बात यह रही कि कविता-पाठ पूर्ण होने के बाद रोगी कविता की याद रही पंक्तियां स्वयं गुनगुनाने लगे। उनके चेहरे में भी बदलाव नजर आया।

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