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विपक्ष ने पुनर्वास नीति खारिज की

झारखण्ड में जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के कारण विस्थापित एक लाख से अधिक लोगों के पुनर्वास से सम्बद्ध सरकार की नीति को रविवार को विपक्षी दलों ने ठुकरा दिया। कैबिनेट ने शनिवार रात दो चरणों वाले पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दे दी।

पहले चरण के अस्थायी पुनर्वास के तहत प्रभावित लोगों को अस्थायी शिविरों में रखा जाएगा, जहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। दूसरे चरण में सरकार फ्लैटों का निर्माण कराएगी, लेकिन केवल गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लोगों के लिए। सरकार ने गैर बीपीएल परिवारों के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुनर्वास नीति भ्रामक है। सरकार को विस्थापितों में भेद नहीं करना चाहिए। जो लोग विस्थापित हुए हैं, सभी गरीब हैं और सभी को इस नीति के दायरे में लाया जाना चाहिए।

मरांडी ने अतिक्रमण हटाने संबंधी अभियान को तत्काल रोकने की मांग को लेकर रविवार को यहां मोराबादी मैदान में भूख हड़ताल शुरू की। कांग्रेस ने भी इस पुनर्वास पैकेज को खारिज कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश सिन्हा ने कहा कि इस नीति में नया कुछ नहीं है। यहां बीपीएल परिवारों के लिए ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में राज्य एवं केंद्र की, दोनों सरकारों द्वारा प्रायोजित आवासीय योजनाएं हैं।

ज्ञात हो कि झारखण्ड हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले 45 दिनों में रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और अन्य जिलों में 5,000 से अधिक अवैध ढाचों को ढहाया जा चुका है।

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