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क्रिकेट के जुनून ने बदला सुधीर का जीवन

भारत के क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद न जाने कितनों की जिंदगी बदल गई। कई के सपने जैसे पूरे हो गए। बिहार के मुजफ्फरपुर के सुधीर कुमार गौतम उन्हीं में से एक हैं। कल तक जो लोग सुधीर को दलित मानकर छूने से भी परहेज करते थे, वे अब सुधीर के अभिनंदन के लिए खड़े होते हैं।

सुधीर भी मानते हैं कि क्रिकेट के जुनून ने ही उन्हें यहां तक पहुंचाया है। क्रिकेट ही उनका पहला प्यार है। शुरू में सुधीर आम लोगों की तरह एक क्रिकेट प्रशंसक के रूप में मैच देखने जाते थे, लेकिन अब स्टेडियम में दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान है। पूरे शरीर पर ऑयल पेंट से तिरंगा बनाकर वह दर्शक दीर्घा में मौजूद होते हैं।

मुजफ्फरपुर में दामोदरपुर के निवासी सुधीर उन खुशकिस्मत लोगों में से हैं, जिन्हें विश्व कप को हाथ में उठाने और चूमने का मौका मिला। सुधीर ने को बताया कि वह साइकिल से पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित एक दजर्न से ज्यादा क्रिकेट स्टेडियम में पहुंचे और क्रिकेट मैच का आनंद उठाया।

2003 में उनकी पहचान सचिन तेंदुलकर से हुई और यहीं से उनकी दुनिया बदल गई। अब वह सचिन के घर बेधड़क जाते हैं। उन्हें इस बात का फख्र है कि सचिन पाजी और उनकी पत्नी अंजलि भी उन्हें बहुत प्यार करती हैं। अंजलि को वह भाभी कहकर बुलाते हैं।

सुधीर के अनुसार, वह सचिन और अंजलि भाभी जैसे बड़े लोगों को तो कुछ नहीं दे सकते, लेकिन हर वर्ष मुजफ्फपुर की शाही लीची तथा लाह की चूड़ियां उन्हें जरूर भेंट करते हैं। जिस दिन भारत ने क्रिकेट विश्वकप जीता था, उन्हें भारत और श्रीलंका के ड्रेसिंग रूम में भी जाने का मौका मिला, जहां सभी खिलाड़ियों ने उन्हें विश्वकप जीतने की बधाई दी।

हरभजन सिंह ने तो उन्हें फाइनल मैच में श्रीलंका के खिलाड़ियों को आउट करने वाली गेंद भी भेंट कर दी। इस पर उन्होंने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, तेंदुलकर और हरभजन सिंह के हस्ताक्षर भी लिए। उस दिन वहां उन्होंने खाना भी खाया। बाद में वह श्रीलंका के ड्रेसिंग रूम में भी गए, जहां मुरलीधरन ने क्रिकेट के प्रति उनके जुनून की सराहना करते हुए भारत की जीत की बधाई दी।

सुधीर पूरी जिंदगी स्टेडियम जाकर सभी मैच देखना चाहते हैं। उनकी दीवानगी को देखते हुए सचिन ने भी सुधीर को विश्वकप के दौरान फैन नंबर वन बताया था। उनकी सचिन और हरभजन से अच्छी जान-पहचान है, लेकिन कभी उन्होंने इसका इस्तेमाल नहीं किया। उनकी इच्छा अस्पताल खोलने की है, जहां गरीबों का नि:शुल्क इलाज हो सके।

इसके लिए वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच के बाद योजना बनाएंगे और फिर इसके लिए चंदा इकट्ठा करेंगे। सुधीर के पिता चंदेश्वर चौधरी कहते हैं कि कल तक लोग उन्हें छूने से परहेज करते थे, लेकिन अब उनका घर पासी का नहीं, बल्कि क्रिकेट के जुनून की मिसाल बन गया है। अब लोग सुधीर से अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान का उद्घाटन करवाना चाहते हैं। पिछले दिनों सुधीर ने एक निजी बैंक का उद्घाटन किया था।

सुधीर के दोस्त सहित मुजफ्फरपुर के अन्य लोग भी उन्हें गौरव मानते हैं। मुजफ्फरपुर निवासी सुमित कुमार कहते हैं कि सुधीर अब क्रिकेट की राष्ट्रीय पहचान बन गए हैं। कल तक लीची के लिए खास पहचान रखने वाला मुजफ्फरपुर अब सुधीर के लिए भी जाना जाता है।

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  • Web Title:क्रिकेट के जुनून ने बदला सुधीर का जीवन