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भारतीयों पर दिखने लगा है थकान का असर

भारतीयों पर दिखने लगा है थकान का असर

यदि 38 साल के सचिन तेंदुलकर, सदाबहार वीरेंद्र सहवाग और 22 साल के विराट कोहली को छोड़ दिया जाए तो आईपीएल के प्रदर्शन को देखकर लगता है कि महेंद्र सिंह धोनी और विश्व चैंपियन टीम के उनके कुछ साथियों पर लगातार क्रिकेट खेलने से थकान का असर पड़ने लगा है।

धोनी पहले ही भारतीय क्रिकेट टीम के व्यस्त कार्यक्रम से खफा थे और उन्होंने कहा था कि इसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। अब आईपीएल में कई खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखकर लगता है कि उन पर वेस्टइंडीज दौरे से पहले ही थकान हावी होती जा रही है।

आईपीएल 28 मई को समाप्त होगा और भारतीय टीम एक जून को वेस्टइंडीज रवाना हो जाएगी जहां उसे चार जून से एक टवेंटी20, पांच वनडे और तीन टेस्ट मैच खेलने हैं। भारतीय खिलाड़ियों को पिछले पांच महीने से विश्राम का समय नहीं मिला और ऐसे में कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को कैरेबियाई दौरे में विश्राम दिया जा सकता है।

तेंदुलकर, कोहली, सहवाग और कुछ हद तक युवराज सिंह और गौतम गंभीर को छोड़ दिया जाए तो कप्तान धोनी, सुरेश रैना, बिग हिटर युसुफ पठान, तेज गेंदबाज जहीर खान और एस श्रीसंत तथा स्पिनर हरभजन सिंह और पीयूष चावला जैसे विश्व चैंपियन टीम के सदस्य आईपीएल में अब तक अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं।

तेंदुलकर ने उम्र और व्यस्तता को फिर से मात देकर आईपीएल में जोरदार प्रदर्शन किया और इस टवेंटी20 टूर्नामेंट के आधा सफर तक अधिकतर समय सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज को मिलने वाली ओरेंज कैप पहने रखी। तेंदुलकर ने अब तक सात मैच में 276 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है।

कोहली ने भी साबित किया कि रायल चैलेंजर्स बेंगलूर का उन्हें रिटेन करने का फैसला गलत नहीं था। इस युवा बल्लेबाज ने पहले सात मैच में 294 रन बनाए। व्यस्त कार्यक्रम की बात का मजाक उड़ाने वाले सहवाग ने पहले सात मैच में 208 रन बनाए थे लेकिन कोच्चि टस्कर्स केरल के खिलाफ 80 रन की पारी से उनके नाम पर आठ मैच में 288 रन दर्ज हो गए।

धोनी ने हाल में कहा था कि आप शारीरिक पहलू से निबट सकते हो लेकिन जितनी क्रिकेट खेली जा रही है उससे आपकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। भारत की विश्व कप जीत के नायक रहे युवराज सिंह ने भी उनका समर्थन किया था लेकिन सहवाग अपने कप्तान से सहमत नहीं थे। विश्व कप के छह दिन बाद शुरू हुए आईपीएल में प्रदर्शन को देखकर लगता है कहीं वास्तव में धोनी पर क्रिकेट की थकान तो हावी नहीं हो रही है।

धोनी ने पहले सात मैच में केवल 137 रन बनाए जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 43 रन रहा। उनकी टीम के साथी रैना ने भी इतने ही मैच खेले जिसमें उनके नाम पर 153 रन दर्ज हैं। आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड रैना के नाम पर है लेकिन यह उपलब्धि वह पहले तीन टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन के दम पर हासिल कर पाए हैं।

युवराज ने विश्व कप में बल्ले और गेंद दोनों से कमाल दिखाया था। आईपीएल में भी उन्होंने अपनी वही फार्म बरकरार रखने की कोशिश की है लेकिन लगता है कि उन पर दूसरी तरफ से सहयोग नहीं मिलने का दबाव है जिससे वह पहले सात मैच में 232 रन ही बना पाए और केवल चार विकेट ही हासिल कर सके। ये चारों विकेट उन्होंने दिल्ली के खिलाफ एक मैच में लिए थे।

यूसुफ पठान पहले सात मैच में बिग हिटर की अपनी ख्याति के अनुरूप प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। आधा टूर्नामेंट निकल जाने तक उनके नाम पर 18.40 की औसत से 92 रन दर्ज थे। इस बीच उन्होंने गेंदबाजी थोड़ा प्रभाव जरूर छोड़ा और आठ विकेट लिए।

यदि गेंदबाजों की बात की जाए तो बेंगलूर को अपने मुख्य गेंदबाज जहीर से खासी निराशा हुई है जो सात मैच में केवल सात विकेट ले पाए हैं। इनमें से तीन विकेट उन्होंने डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ एक मैच में लिए थे। उनका 7.27 का इकोनोमी रेट भी प्रभावशाली नहीं है।

हरभजन को मुंबई इंडियन्स से काफी उम्मीदें थी लेकिन उन्हें छह मैच में सात विकेट लिए हैं और अहम बात यह है कि उन्होंने चेन्नई के खिलाफ मुंबई में खेले गए मैच में 18 रन देकर पांच विकेट लिए थे। बाकी पांच मैच में वह केवल दो विकेट निकाल पाए। मुंबई के ही मुनाफ पटेल और चेन्नई सुपरकिंग्स के आर अश्विन ने सात-सात मैच खेलकर प्रति मैच एक विकेट की दर से सफलता हासिल की है।

एस श्रीसंत ने दिल्ली के खिलाफ करिश्माई प्रदर्शन किया लेकिन इससे पहले उन्होंने जो तीन मैच खेले थे उनमें उन्होंने केवल एक विकेट लिया था। इस तरह से अब उनके नाम पर चार मैच में तीन विकेट दर्ज हैं। लेग स्पिनर चावला भी पहले पांच मैच में चार विकेट ही ले पाए थे।

 

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